Published on 2018-07-04

उच्च शिक्षा मंत्री श्री धनसिंह रावत ने देसंविवि की शिक्षा को अनुकरणीय बताया

• विद्यार्थियों में गिरते नैतिक मूल्यों पर जताई चिंता• उच्च शिक्षा मंत्री ने देव संस्कृति विवि की शिक्षा नीतियों को अनुकरणीय बताया

• देसंविवि की शिक्षा नीतियों को कई विदेशी शिक्षण संस्थानों ने अपनाया और सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए हैं। • डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी

उत्तराखंड के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्री धनसिंह रावत की अध्यक्षता में देव संस्कृति विश्वविद्यालय में १७ जून को शिक्षा उन्नयन विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह, शिक्षा निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी, कुमायूं विवि के कुलपति एचएस धामी, उत्तराखण्ड संस्कृत विवि के कुलपति प्रो़ पीयूषकांत दीक्षित सहित उत्तराखंड के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं सभी महाविद्यालयों के प्राचार्य- १०० से अधिक शिक्षाविदों ने भाग लिया।
इस सम्मेलन में युवा पीढ़ी के बढ़ते नैतिक पतन को रोकने के उपायों पर प्रमुख रूप से चर्चा हुई। मंत्री महोदय ने शिक्षाविदों से देव संस्कृति विश्वविद्यालय की शिक्षा पद्धति की सराहना करते हुए उसका अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचार और देव संस्कृति विश्वविद्यालय की शिक्षा पद्धति सबके लिए अनुकरणीय है। उन्होंने उच्च शिक्षा में नैतिक मूल्यों के समावेश के लिए मिलकर प्रयास करने का भी आह्वान किया।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने कहा कि हमारा लक्ष्य विद्यार्थियों को केवल पढ़ाना नहीं, उन्हें गढ़ना होना चाहिए। आज की सबसे बड़ी आवश्यकता शैक्षिक पाठ्यक्रम के साथ विद्यार्थियों के जीवन में नैतिकता को उतारने की है। उन्होंने इस कार्य में परम पूज्य गुरुदेव के योगदान और आध्यात्मिक जीवन शैली के योगदान की भी चर्चा की।
प्रतिकुलपति, देसंविवि ने कहा कि लाटविया सहित कई देशों के शैक्षणिक संस्थानों ने इसे अपनाया है, जिससे वहाँ के विद्यार्थियों में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। यह प्रयोग देवभूमि के शिक्षण संस्थान भी कर सकते हैं।

उच्च शिक्षा विभाग की निदेशक सविता मोहन ने उत्तराखण्ड के विद्यार्थियों की प्रतिभा के दृष्टांत प्रस्तुत किए और उनकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में पूरा- पूरा सहयोग करने का विश्वास दिलाया। कार्यक्रम का संचालन गोपाल शर्मा ने किया।


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