जनवरी २०२१ में मुम्बई में होगा गायत्री अश्वमेध महायज्ञ

Published on 2018-07-05

श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने गड़करी रंगायतन, ठाणे में आयोजित विशाल सभा में घोषणा की

अश्वमेध विनाशकारी प्रवृत्तियों का शमन कर व्यक्ति को सन्मार्गगामी बनाने का एक महान आध्यात्मिक प्रयोग है। आज नशा, व्यभिचार, भ्रष्टाचार, आतंक, अनाचार जैसी बुराइयों से समाज को मुक्ति दिलाने के लिए इस प्रकार के प्रयोगों की नितांत आवश्यकता है। अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा २१ से २६ जनवरी २०२१ की तारीखों में मुम्बई में भी अश्वमेध गायत्री महायज्ञ का आयोजित किया जाएगा।

श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने १७ जून २०१८ को ठाणे के सुप्रसिद्ध च्गड़करी रंगायतनज् सभागार में आयोजित एक विशाल सभा में इस आशय की घोषणा की। उन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट, जयघोष और शंखध्वनि के साथ वहाँ उपस्थित गणमान्यों और गायत्री परिवार के २००० समर्पित कार्यकर्त्ताओं ने इसका स्वागत किया। इस बीच श्रद्धेय ने अश्वमेध की ध्वजा मुख्य संयोजक श्री मनुभाई पटेल को सौंपी। इस अवसर पर सभी दर्शकों ने अश्वमेध यज्ञ की टोपी पहन रखी थीं और उनके हाथों में ध्वजा लहरा रही थी। श्रद्धेय डॉ. साहब ने सभी से भुजा उठाकर संकल्प दोहरवाए।

शांतिकुंज के उद्गाता बंधु सर्वश्री ओंकार पाटीदार, नारायण रघुवंशी, बसंत यादव ने 'अश्वमेध की ध्वजा उठाकर बढ़ो सृजन सेनानी ...' गीत प्रस्तुत किया तो पूरा सभागार उत्साह- उमंगों से भर गया।

३० माह चलने वाला अनुष्ठान
श्रद्धेय ने कहा कि यह मात्र छ: दिवसीय कार्यक्रम नहीं, अब से आरंभ होकर ३० माह तक चलने वाला एक विराट अनुष्ठान है। जाग्रत् आत्माओं को तलाशना, उनके व्यक्तित्व को ऊँचा उठाना और उनकी प्रतिभा को राष्ट्र के नवनिर्माण में नियोजित करना हमारा लक्ष्य है। सही मायनों में राष्ट्र को सशक्त और समर्थ बनाने का यही एक विधान है। उन्होंने पावर पॉइण्ट प्रेज़ेण्टेशन के साथ अश्वमेध की अवधारणा स्पष्ट की।

समर्पण- सक्रियता की झाँकी
श्रद्धेय डॉ. साहब ने मुम्बई वासियों की मिशन निष्ठा और तद्नुरूप सक्रियता की बहुत सराहना की। उल्लेखनीय है कि गतवर्ष महाराष्ट्र में केन्द्रीय टोलियों द्वारा २४ कुण्डीय श्रद्धा संवर्धन गायत्री महायज्ञ के १०० आयोजन हुए, जिनमें से अकेले मुम्बई में ही ५६ कार्यक्रम सम्पन्न हुए। १०० से अधिक दीप महायज्ञ भी मुम्बई में हुए। इनके माध्यम से मुम्बई का गहन मंथन हुआ।

कार्यकर्त्ताओं में एक नई ऊर्जा उत्पन्न हुई, मुम्बई जोन समन्वयक श्री मनुभाई पटेल तथा ठाणे केन्द्र के प्रभारी श्री उपेन्द्र चौबे के नेतृत्व में मुम्बई वासियों में अश्वमेध महायज्ञ आयोजित करने का उत्साह उभरा, जिसे शांतिकुंज ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

गड़करी रंगायतन में आयोजित सभा में शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधि डॉ. ब्रजमोहन गौड़, देव संस्कृति विवि. के कुलपति श्री शरद पारधी एवं दक्षिण पश्चिम जोन समन्वयक शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री कैलाश महाजन मुख्य रूप से उपस्थित थे।

एक लाख व्रतधारी तैयार करें
समारोह के अंत में श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने संकल्प दिलाये। इस अवसर पर उन्होंने अश्वमेध को परिवार का एक नया सदस्य के रूप में शामिल करने, इसके लिए नित्य एक माला गायत्री महामंत्र का जप करने और एक रुपया निकालने का आह्वान किया। महायज्ञ की सफलता के लिए उन्होंने ऐसे एक लाख लोग तैयार करने का आह्वान किया।

१०८ साधना केन्द्र बनेंगे
मुम्बई जोन समन्वयक श्री मनुभाई ने कहा कि मुम्बई में १०८ साधना केन्द्र स्थापित होंगे, जहाँ साप्ताहिक सामूहिक साधना का क्रम चलेगा। इनके माध्यम से नये व्रतधारी साधक तैयार किए जाएँगे।

• मुम्बई मेरी जन्मभूमि होने के कारण यहाँ आयोजित हो रहे अश्वमेध गायत्री महायज्ञ से मेरा विशिष्ट लगाव होगा।
• यह अश्वमेध यज्ञ मुम्बई, महाराष्ट्र को दक्षिण भारत से जोड़ने की मज़बूत कड़ी सिद्ध होगा।
* श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी

महाराष्ट्र का कार्य प्रगति विवरण
श्री कैलाश महाजन ने इस वर्ष महाराष्ट्र की सक्रियता का विवरण दिया। नागपुर में आयोजित युग सृजेता युवा संकल्प समारोह, उसके बाद शेगाँव में सम्पन्न कन्या कौशल शिविर तथा उसके बाद महाराष्ट्र में सम्पन्न श्रद्धा संवर्धन महायज्ञों की उपलब्धियों से उन्होंने अवगत कराया।

महाराष्ट्र सम्पूर्ण सामर्थ्य झोंक देगा • श्री शरद पारधी जी
युग निर्माण योजना मनुष्य को देवता बनाने वाली योजना है। गुरुसत्ता का सूक्ष्म संरक्षण इसके साथ जुड़ा है, लेकिन पुरुषार्थ हम सबको ही करना होगा। महाराष्ट्र के परिजनों में बहुत क्षमता है। इस अश्वमेध में भी हमारे परिजन अपनी सम्पूर्ण सामर्थ्य झोंक देंगे, ऐसा विश्वास है।

यह एक दुर्लभ सौभाग्य है • डॉ. ब्रजमोहन गौड़
यह आपके लिए सौभाग्य का अवसर है। ऐसे अवसर कभी- कभी आते हैं जब भगवान स्वयं सहयोग माँगते हैं। जाग्रत् आत्माएँ महाकाल की पुकार को कभी अनसुनी नहीं करतीं, युगधर्म निभाने हेतु अपना समय, श्रम, साधन सब कुछ समर्पित कर देती हैं और बदले में श्रेय, सम्मान पाती हैं।


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