Published on 2018-07-05
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चेतना ग्राम संस्थान : पिछड़ी बहिनों के उत्कर्ष की एक क्रांतिकारी पहल

  • ८०० बहिनें स्वावलम्बी बनीं
  • २२ स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं
  • आसपास के गाँवों में फैल रहा है आन्दोलन
  • सिलाई, ब्यूटी पार्लर चलाने के अलावा ये बहिनें मोमबत्ती, अगरबत्ती, जनेऊ, सर्फ, साबुन, हर्रापाक, राखी, बेसन के लड्डू, नमकीन, अचार, पापड़ के उद्योग भी चलाती हैं।
  • बच्चों की शिक्षा और गर्भवती बहिनों के संस्कार की ओर दिया जा रहा है ध्यान
जयपुर। राजस्थान
बचपन से ही गायत्री परिवार के संस्कारों में रची- पची बहिन श्रीमती विभा अग्रवाल जयपुर क्षेत्र में नारी सशक्तीकरण की दिशा में अपनी विशेष पहचान बना रही हैं। वे अपनी संस्था 'चेतना ग्राम संस्थान' के माध्यम से आज ८०० से अधिक बहिनों को स्वावलम्बी बना चुकी हैं। उनकी पहल से प्रशिक्षित जयपुर शहर के अलावा सपेरों की बस्ती, दांतली, रामचंद्रपुरा, गोनैट, मथुरावाला आदि कई गाँवों की बस्तियाँ सिलाई कर और ब्यूटी पार्लर चलाकर अपनी आजीविका कमा रही हैं।

चेतना ग्राम संस्थान ने ३ वर्ष पूर्व जयपुर की गरीब बस्तियों में स्वावलम्बन प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना कर जरूरतमंदों की सेवा का कार्य आरंभ किया था। उन्हें सिलाई, कम्प्यूटर, योग आदि का प्रशिक्षण दिया। क्रमश: स्वयं सहायता समूह बनते गए। आज ऐसे २२ समूह सक्रिय हैं।

गर्भ महोत्सवों का शुभारंभ
ग्राम चेतना संस्थान जयपुर ने अपनी स्थापना के ३ वर्ष पूरे होने पर गर्भ महोत्सवों की नई पहल की है। इस क्रम में २१ से २३ अप्रैल २०१८ की तारीखों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें कई गाँवों की ४५० बहिनों ने भाग लिया। कार्यक्रम सम्पन्न कराने जबलपुर, मध्य प्रदेश से अमिता सक्सेना एवं अलवर, राजस्थान से सरोज बहिन पहुँची थीं। इसमें २५ गर्भवती बहिनों के गर्भ संस्कार कराए गए। डॉ. एस.एस. अग्रवाल के मेडिकल कॉलेज में भी गर्भ संस्कार पर पावर पॉइण्ट प्रेजेण्टेशन दिया गया, जिससे लोगों में गर्भस्थ शिशु के निर्माण के प्रति नवजागृति आई है।


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बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी मे बाल संस्कार शाला चलाया जा रहा हैl यहाँ पर शिक्षा के साथ संस्कार भी बच्चों को दिया जाता हैl बाल संस्कार शाला मे बच्चों को जीवन जीने की कला सिखाई जाती है.....