ब्राह्मण राष्ट्र की सच्ची सम्पत्ति हैं-शैल जीजी |

लोकमंगल ही ब्राह्मण का एकमात्र जीवन लक्ष्य-प्रणव पण्ड्याजी|

  

       ब्राह्मण बनो, शुभ कर्म करो, जहाँ रहो वहाँ सतयुगी समाज के निर्माण के लिए सतत प्रयत्नशील रहो। विमल प्रेम के इस पवित्र पर्व श्रावणी-रक्षाबंधन पर अपने भाइयों से यही कामना है।
    युगतीर्थ शांतिकुंज में मनाये गये रक्षाबंधन और श्रावणी पर्व पर संस्था प्रमुख श्रद्धेया शैल जीजी ने यह संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति ऋषि परंपरा को अपनाने की प्रेरणा देती है। आप सब एक सच्चे ब्राह्मण, महान तपस्वी वेदमूर्ति पं.श्रीराम शर्मा आचार्य जी के शिष्य हैं। उन्होंने हमें सदा ब्राह्मण बनने की प्रेरणा दी है, हमें सादा जीवन-उच्च विचार के सूत्र को अपनाकर जन-जन पर प्रेम की वर्षा करते हुए उनके जीवन का अनुकरण करना है। 
    डॉ. प्रणव जी ने कहा कि ब्राह्मण जन्म से नहीं, अपने कर्मों से पूजे जाते हैं। जो आत्मसुख की कामना छोड़कर तपस्वी जीवन जीते हुए लोकमंगल को अपना जीवन लक्ष्य बना ले, वही ब्राह्मण है। समाज ऐसे ही तेजस्वी, तपस्वी जीवन साधकों के पुरुषार्थ से उन्नति करता है। परम पूज्य गुरुदेव के अलावा गाँधी, विनोबा, सरदार पटेल, शास्त्री जी, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, चाणक्य आदि अनेक श्रद्धास्पद विभूतियाँ हमें सच्चे ब्राह्मणत्व की प्रेरणा देती हैं।
    श्रावणी सृष्टि के निर्माण का दिवस है। आज के दिन ब्रह्म आह्वान के साथ शांतिकुंज में हजारों आश्रमवासी-शिविरार्थी भाई-बहिनों ने श्रावणी और रक्षाबंधन पर्व मनाया। ब्रह्मवेला में भाइयों का सामूहिक श्रावणी उपाकर्म हुआ। इसके प्रायश्चित्त विधान के अंतर्गत जहाँ गोबर, गोमूत्र, यज्ञभस्म आदि से स्नान करते हुए अपने दोष-दुर्गुणों के प्रति जागरूक रहकर उन्हें दूर करने की प्रेरणा ली। तत्पश्चात गंगाजल, दुग्ध आदि से स्नान करते हुए जीवन में सद्गुणों के अभिवर्धन के संकल्प लिये। हेमाद्रि संकल्प, अर्थात् स्वर्णिम शिखर की भाँति जीवन जीने और सतत ज्ञानार्जन करने के संकल्प लिये गये। दिनेश पटेल ने श्रावणी कर्मकाण्ड सम्पन्न कराया।
    वृक्षपूजन श्रावणी उपाकर्म का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष था। उद्यान विभाग प्रभारी सुधीर भारद्वाज ने वृक्ष पूजन करते हुए श्रावणी उपाकर्म कर रहे हजारों साधकों को वृक्षारोपण की भावभरी प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि वृक्ष काट कर एक तरह से हमने अपना जीवन ही नष्ट कर दिया है। सृष्टि संतुलन में वृक्षों की सर्वोच्च भूमिका है, अतः हर व्यक्ति को वृक्ष लगाने ही चाहिए। मंच पर 21 वृक्षों का प्रतीक पूजन किया गया। तत्पश्चात शिविरार्थियों को प्रसाद स्वरूप एक-एक पौध प्रदान करते हुए उसे अपने यहाँ रोपित-संरक्षित करने की प्रेरणा दी।
    शांतिकुंज में दिनभर प्रेम और उल्लास का क्रम रहा। डॉ. प्रणव जी ने बहिनों से राखी बँधवाई और शैल जीजी ने भाइयों को राखी बाँधी। परम पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी एवं परम वंदनीया माता भगवती देवी जी की चरण पादुकओं पर राखी अर्पण के साथ जीजी-डॉ. साहब से भेंट का क्रम लगभग आठ घंटे चला। आश्रम में राष्ट्र-गौरव की अनुभूति के साथ भाई-बहिनों द्वारा राखी बाँधने-बँधवाने का उत्साह अद्भुत था। रक्षाबंधन के प्रेरक गीतों से दिन भर दिव्य प्रेरणाएँ देते रहे।







Write Your Comments Here:


img

गृह मंत्री अमित शाह बोले- वर्तमान एजुकेशन सिस्टम हमें बौद्धिक विकास दे सकता है, पर आध्यात्मिक शांति नहीं दे सकता

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हम उन गतिविधियों का समर्थन करते हैं जो हमारे देश की संस्कृति और सनातन धर्म को प्रोत्साहित करती हैं। पिछले 50 वर्षों की अवधि में, हम हम सुधारेंगे तो युग बदलेगा वाक्य.....

img

शान्तिकुञ्ज में 75वाँ स्वतंत्रता दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया

प्रसिद्ध आध्यात्मिक संस्थान गायत्री तीर्थ शांतिकुंज, देव संस्कृति विश्वविद्यालय एवं गायत्री विद्यापीठ में 75वाँ स्वतंत्रता दिवस उत्साह पूर्वक मनाया गया। शांतिकुंज में गायत्री परिवार प्रमुख एवं  देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति  श्रद्धेय डॉक्टर प्रणव पंड्या जी तथा संस्था की अधिष्ठात्री.....