Published on 2018-08-22

जल संकट हेतु प्रबंधन ही एकमात्र उपाय : डॉ. पण्ड्याजी
वर्तमान समय की मांग जल प्रबंधनः एच.पी. उनियाल

हरिद्वार २२ अगस्त।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के समिति कक्ष में स्वच्छ भारत अभियान विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला का शुभारंभ देसंविवि के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी, इंडिया वाटर वर्क एसोशिएन (आईडब्ल्यूडब्ल्यूए) के पूर्व महासचिव श्री कोमल प्रसाद, राज्य योजना आयोग के सलाहकार श्री एच.पी. उनियाल, नमामि गंगे प्रोजेक्ट के श्री केके रस्तोगी आदि ने दीप प्रज्जवन कर किया। इसमें जल प्रबंधन, व्यवस्थापन की समस्या एवं चुनौती जैसे विषय पर विशेषज्ञों ने अपने- अपने विचार रखे। कार्यशाला के प्रथम में सैद्धांतिक पक्ष तथा शेष दो सत्र में तकनीकी विषय पर विचार- विमर्श हुआ।

इस अवसर पर कार्यशाला के प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि देसंविवि के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि वर्तमान समस्याओं में जल संकट एक बड़ी समस्या है। इसका समाधान के लिए प्रबंधन एवं भण्डारण ही एक मात्र उपाय है। अखिल विश्व गायत्री परिवार इस क्षेत्र में भी एक विशेष अभियान चला रहा है। इसके तहत देश भर में जलस्रोतों के पुनर्जीवन एवं सफाई अभियान के लिए उल्लेखनीय कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि २५२५ किमी की दूरी तय करने वाले पतित पावनी माँ गंगे को अविरल व स्वच्छ बनाये रखने हेतु चरणबद्ध तरीके से कार्य किये जा रहे हैं। इसमें गायत्री परिवार के कई लाख स्वयंसेवक जुटे हैं। भगीरथ के दोनों तटों को हरी चुनर चढ़ाने के लिए वृहत स्तर पर वृक्षारोपण भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शांतिकुंज व स्थानीय परिजनों के सहयोग से नेपाल की गंगा माने जाने वाली बाग्मति नदी का पुनर्जीवन किया जा चुका है। अब बाग्मति नदी कल- कल छल- छल के साथ अविरल बह रही है। इस अभियान के लिए गायत्री परिवार को अंतर्राष्ट्रीय सम्मान भी मिला है।

इससे पूर्व आईडब्ल्यूडब्ल्यूए के पूर्व महासचिव श्री कोमल प्रसाद ने उत्तराखण्ड राज्य में पानी की समस्या एवं समाधान पर अपने रिसर्च प्रस्तुत किये। साथ ही उन्होंने जिले वार पानी उपलब्धता पर पांवर प्वाइंट द्वारा चेताया कि अब नहीं सुधरे तो पानी की समस्या और बढ़ सकती है। देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में हमारे कर्त्तव्य एवं दायित्व विषय पर बोलते हुए वैश्विक स्तर पर बढ़ रही समस्याओं की ओर इंगित किया और कहा कि इसका समाधान के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा, तभी हम सुंदर भविष्य की कल्पना कर सकते हैं।नमामि गंगे प्रोजेक्ट के श्री केके रस्तोगी, राज्य योजना आयोग सलाहकार श्री एच.पी. उनियाल, इंजी. वाई.के. मिश्रा, डॉ. दीपक खरे, आदि ने जल संरक्षण, भण्डारण पर अपने- अपने विचार रखे। कार्यक्रम समापन अवसर पर जल निगम उत्तराखण्ड के चीफ इंजीनियर श्री वीसी पुरोहित ने अतिथियों का आभार प्रकट किया। इस दौरान देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधीजी, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी, कुलसचिव श्री संदीप कुमार सहित विवि परिवार उपस्थित रहे।


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