Published on 2018-08-24 HARDWAR

देसंविवि के विद्यार्थियों ने जानी ध्यान की गरिमा
हरिद्वार 24 अगस्त।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि मनुष्य के विकास में ध्यान का विशेष महत्त्व है। ध्यान से कल्पना शक्ति व मानसिक क्षमता का भी विकास होता है। ऋषि-मुनियों ने ध्यान से ही अपनी विशेष शक्ति का जागरण किया करते थे। आज भी साधक मनोयोगपूर्वक ध्यान से अपनी क्षमताओं को कई गुना बढ़ा सकता है।

 श्रद्धेय डॉ. पण्ड्या देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित ध्यान साधना की विशेष कक्षा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में प्रकाश को खुशियों का प्रतीक माना गया है। प्रकाश मन को उत्साह, उमंग से भर देता है। ध्यान की रोशनी से हृदय का द्वार खुलता है। इसी माध्यम से मनुष्य परमात्मा की शरण में पहुंचता है। उन्होंने कहा कि रोशनी तीन प्रकार की होती है-शशांक, सूर्य और चंद्रमा। इन तीनों को परमात्मा के निकट जाने का स्रोत माना गया है। यह रोशनी जब साधक के शरीर, हृदय में पहुँचती है, तो वह रोमांचित हो उठता है और उसका व्यक्तित्व भी प्रकाशित होने लगता है। उन्होंने कहा कि ध्यान से मनुष्य की कल्पना शक्ति बढ़ती है, जिससे वह पल भर में कविता, कहानी और छंद का निर्माण कर लेता है। विभिन्न श्रेष्ठ पुस्तकों के अध्ययन से भी ज्ञान बढ़ता है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक कल्पना के आधार पर मनुष्य आने वाले खतरों को पहले से ही भाँप लेता है।

संगीत विभाग के भाइयों ने ‘गढ़ फिर कोई दीप नया तू मिट्टी मेरे देश की..’ सुमधुर संगीत से सबके मन को उल्लसित किया। इस अवसर पर कुलपति श्री शरद पारधी जी, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव श्री संदीप कुमार सहित समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षक-शिक्षिकाएँ, विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।


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