शांतिकुंज में श्रावणी, दस स्नान का हुआ विशेष आयोजन

Published on 2018-08-26 HARDWAR

हरिद्वार 26 अगस्त।

                देवसंस्कृति विवि एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के लाखों लोगों ने अपनी आराध्य गुरुसत्ता पं. श्रीराम शर्मा आचार्यश्री के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से श्रावणी पर्व पर रक्षा सूत्र धारण किये। युगऋषि आचार्यश्री की सुपुत्री एवं शांतिकुंज अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैल दीदी ने देश-विदेश से आये एवं आश्रमवासी भाइयों के कलाई में रक्षा-सूत्र बाँधी तथा सभी को पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

                इस अवसर पर शांतिकुंज अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैल दीदी ने कहा कि रक्षासूत्र मात्र कच्चा धागा होता है, लेकिन इसमें जब श्रद्धा-भावना की शक्ति जुड़ जाती है, तो यह सामान्य धागा नहीं रहता। यह इतना मजबूत हो जाता है, जिसे तोडऩा नामुमकिन हो जाता है। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि पवित्र संबंधों को स्थापित करने वाला श्रावणी पर्व के माध्यम से अपने अंदर ब्राह्मणत्व का भाव पैदा करें। संस्कृति की रक्षा करने के लिए तत्पर रहें। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में श्रावणी के दिन वेदारंभ संस्कार होते थे। इससे युवाओं को ज्ञानवान बनाने के साथ संस्कृति की रक्षा के लिए तैयार करने का कार्य होता था। आज पुन: इस विधा को प्रारंभ करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि देसंविवि के युवाओं को इस दिशा में सार्थक दिशा दी जा रही है।

                देसंविवि, शांतिकुंज व देश के कोने-कोने से आई बहिनों ने श्रद्धेय डॉ. पण्ड्या जी को राखी बांधीं तथा उनके नेतृत्व में चलाये जा रहे विभिन्न रचनात्मक कार्यों में कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलने का संकल्प व्यक्त किया।

                इससे पूर्व मुख्य सभागार में हेमाद्रि संकल्प सम्पन्न हुआ। पर्व का महत्त्व एवं प्रेरणा के विषय पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम संचालकों ने कहा कि यह सृष्टि नियंता के संकल्प से उपजी है। हर व्यक्ति अपने लिए एक नई सृष्टिï रचता है। दसस्नान द्वारा अन्त:करण पर जमे कषाय-कल्मषों को धोने तथा यज्ञोपवीत परिवर्तन से उसके गुणों को पुन: धारण करने के लिए संकल्पित हुआ जाता है। पश्चात् शंतिकुंज की ब्रह्मïवादिनी बहिनों ने 27 कुण्डीय यज्ञशाला में गायत्री महायज्ञ में विश्व कल्याण के लिए विशेष वैदिक मंत्रों के साथ यज्ञ सम्पन्न कराया। सायंकाल भव्य दीपमहायज्ञ भी सम्पन्न हुआ।


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