Published on 2018-08-28
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सिल्चर और तिनसुकिया की हुर्इं जोनल गोष्ठियाँ

भावी कार्ययोजनातिनसुकिया :
• २४ एक दिवसीय युवा सम्मेलन
• १५ स्वावलम्बन, योग प्रशिक्षण शिविर

सिल्चर :
• ५१ पाँच कुण्डीय यज्ञ
• ४ चौबीस कुण्डीय यज्ञ
• १००० घरों में देवस्थापना

• गोविंद जोशी और प्रदीप अग्रवाल ने प्रज्ञा अभियान के माध्यम से जनसंपर्क बढ़ाने की योजना आरंभ की।

तिनसुकिया। असम
पूर्वोत्तर प्रांतों के जोनल संगठन ने सिल्चर (७ एवं ८ जुलाई) तथा तिनसुकिया (१४ एवं १५ जुलाई) में बड़ी महत्त्वपूर्ण संगठनात्मक गोष्ठियाँ आयोजित कीं। इनमें भारतीय संस्कृति के पुनर्जीवन की आवश्यकता को बड़े प्रभावशाली ढंग से समझाया गया और भावी सक्रियता का निर्धारण किया गया।

सिल्चर में शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. बृजमोहन गौड़ की मुख्य उपस्थिति में गोष्ठी हुई। सिल्चर, करीमगंज, मिजोरम तथा कोलासीव के १५० कार्यकर्त्ताओं ने भाग लिया। डॉ. गौड़ जी ने परम पूज्य गुरुदेव के संरक्षण और प्रेरणा से चल रही मानव में देवत्व के जागरण और स्वर्ग की सृष्टि की योजना को बड़े प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि युग परिवर्तन की वर्तमान वेला में हमें प्रत्यक्ष राक्षसों को नहीं, जनजीवन में विद्यमान राक्षसी प्रवृत्तियों को समाप्त करना है। इसके लिए हर भावनाशील संस्कृतिनिष्ठ को रीछ- वानर जैसी भूमिका निभाते हुए समयदान- अंशदान करना चाहिए।

तिनसुकिया में नगर के २०० तथा जागुन, दुमदुमा, दुलियाजान, शिवसागर, डिब्रूगढ़ एवं गुनानगर के १५० समर्पित कार्यकर्त्ताओं ने भाग लिया। शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री कालीचरण शर्मा जी ने कहा कि यह युग परिवर्तन की वेला है। राम और कृष्ण की भाँति युगऋषि परम पूज्य गुरुदेव ने इसे क्रियान्वित करने के लिए विराट गायत्री परिवार बनाया है। आप सब सौभाग्यशाली हैं जो रीछ- वानर, ग्वालबाल की तरह इस योजना में भागीदारी के लिए चुने गए हैं।

जोन प्रभारी श्री परमानन्द द्विवेदी ने दोनों ही गोष्ठियों में भावी कार्यक्रमों और कार्ययोजना पर प्रकाश डाला।

सिल्चर में नवम्बर २०१९ में विराट संस्कार महोत्सव आयोजित करने और उसके प्रयाज स्वरूप ५१ स्थानों पर पाँच कुण्डीय यज्ञ व ४ स्थानों पर चौबीस कुण्डीय यज्ञ आयोजित करने का निर्णय हुआ है। इनके माध्यम से १००० घरों में देवस्थापना कराने और उन्हें विभिन्न पत्रिकाओं के सदस्य बनाने का लक्ष्य है। सभी का सुंदर सहयोग मिला, सर्वश्री धीरज अग्रवाल, शंकर राय, कृष्णा राय, दीपक सोनार, राजीव राय, शिवनाराण पासी, अरविंद तिवारी, कुलदीप वैद्य का विशेष योगदान रहा।

तिनसुकिया में २४ स्थानों पर एक दिवसीय युवा सम्मेलन आयोजित करने, २४ मण्डलों का गठन करने, १५ स्वावलम्बन और योग प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने का निश्चय हुआ। सर्वश्री रामकिशन अग्रवाल, श्रीमती हीरा देवी, गौतम पाण्डेय, शम्भू वर्मा, अरुण, संतोष पाण्डेय, नारायण चौधरी का अग्रणी योगदान रहा।

दोनों स्थानों पर शांतिकुंंज प्रतिनिधि सर्वश्री विनय केसरी, दिवाकर पारखे, प्रदीप शर्मा, क्षोरोदेश प्रसाद, गोविंद जोशी, राजेन्द्र अग्रवाल, प्रमोद कुमार, गिरधारी मिश्रा ने समूह चर्चा समन्वय एवं कार्यक्रम संचालन में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। श्री प्रेमलाल बिरला व श्री चंद्रप्रकाश भानू की संगीत टोली ने प्रज्ञागीतों से युग निर्माणी उल्लास का संचार किया।

पूर्वोत्तर प्रांतों में प्रज्ञा अभियान को जनसंपर्क का आधार बनाने और प्रत्येक शाखा द्वारा ३०- ३० पाक्षिक बाँटने की योजना का शुभारंभ हुआ। गायत्री परिवार दीमापुर के श्री गोविंद जोशी और जागुन के श्री प्रदीप अग्रवाल ने इसका शुभारंभ किया।


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