Published on 2018-09-03 KOZHIKODE

केरला प्रान्तीय आपदा राहत समिति 30 अगस्त 2018 गायत्री परिवार केरल के प्रान्तीय कार्यकर्त्ताओं की विशेष संगोष्ठी कालीकट में आज सम्पन्न हुई। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य आपदा राहत कैम्प और एक वर्षीय कार्य योजना को गतिशील बनाना।

शान्तिकुञ्ज, हरिद्वार के वरिष्ठ प्रतिनिधि एवं दक्षिण भारत ज़ोन प्रभारी आदरणीय डॉ. बृजमोहन गौड़ जी, आपदा प्रबंधन के प्रभारी श्री राकेश जैसवाल जी, केरल ज़ोन प्रभारी श्री उमेश कुमार शर्मा जी, मलयालम अखण्ड ज्योति के सम्पादक श्री एम.टी. विश्वनाथन जी, कालीकट मारवाड़ी संघ अध्यक्ष श्री आलोक साबू जी, कालीकट महिला मण्डल, एर्नाकुलम के श्री अशोक अग्रवाल, श्री लाजपतराय कचौलिया जी, उमा टेक्सटाइल के मालिक श्री सुधीर जी और मलयालम अनुवादक श्री ज्योतिष प्रभाकरन जी आदि 24 लोगों ने संगोष्ठी में भाग लिया।

डॉ. बृजमोहन गौड़ जी ने कहा - कि, प्रान्तीय समिति गठित कर, गाँवों का सर्वेक्षण कर, प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी में कार्य की प्राथमिकता के आधार पर विभाजित किया जाय। उसके बाद उसका कितना बजट बनेगा ? उसको लेकर गायत्री परिवार की मातृ संस्था शान्तिकुञ्ज, हरिद्वार पहुँचेगे, वहाँ अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पंड्या जी एवं आदरणीया शैल जीजी जी के सम्मुख प्रस्ताव रखा जाएगा। उसके बाद वहीं पर भावी कार्य योजना बनेगी। अगले माह केरल प्रान्तीय आपदा राहत समिति के लोग शान्तिकुञ्ज पहुँच रहे हैं।

जिले वार आपदा राहत वाहनियों का गठन भी इसी बीच होगा। उसके बाद समाज वार आपदा वाहनियों का भी गठन किया जाएगा। इन वाहनियों को प्रबुद्ध करने के लिये आगामी अक्टूबर माह में पाँच दिवसीय "आपदा राहत प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर" कालीकट में आयोजित होगा। जिसमें 50 लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण देने शान्तिकुञ्ज के श्री राकेश जैसवाल जी कालीकट पहुँचेंगे। आपने सभी को आपदा राहत करने के सूत्र सुझाये।

केरल बाढ़ पीड़ित लोगों को 10 अगात 2018 से अब तक 'प्रथम चरण' में भोजन के 50,000 पैकेटों को वितरण किये गये। 'द्वितीय चरण' में कपड़े और वर्तन किट 5,000 परिवारों को दिये गये। 'तृतीय चरण' में मेडिकल कैम्प चलाये गये। 'चतुर्थ चरण' में स्वच्छता अभियान चलाया गया। यह सभी एर्नाकुलम, कालीकट, कन्नूर, वायनाड, त्रिवेन्द्रम आदि स्थानों पर वेग के साथ सम्पन्न हुआ।

अब 'पंचम चरण में ग्रामों में सर्वेक्षण कर, वहाँ की आवश्यकता, उनको राहत सहायता, उनके आवास आदि की समुचित व्यवस्था बनाने की योजना प्रारम्भ हुई है। पहले देवालय, विद्यालय, समुदायिक स्थलों की देख-भाल करने की व्यवस्था बनाई गयी।

साधु आत्मा, माननीय, श्री एम टी विश्वनाथन जी ने गरीब, असहाय, पिछड़े, शोषित, उपेक्षित, दलित, आदिवासियों की हृदय से सहायता करने की अभिलाषा व्यक्त की, उनकी दैनीय स्थिति को देख द्रवित हो उठे। और उसे पूरा करने का ताना बाना आदरणीय डॉ. गौड़ जी ने बनाया उन्होंने उसे पूरा करने का आश्वासन शान्तिकुञ्ज की ओर से दिलाया।

दक्षिण भारत ज़ोन
शान्तिकुञ्ज, हरिद्वार


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