तन को स्वस्थ व मन को स्वच्छ रखता है ध्यान: श्रद्देय डॉ. प्रणव पण्ड्या

Published on 2018-09-08 HARDWAR

देसंविवि के विद्यार्थियों ने ध्यान में लगाया गोता

हरिद्वार 7 सितम्बर।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि वर्तमान समय में अनेकानेक लोग कई तरह के मनोरोगों व अन्य तरह की समस्याओं से पीड़ित हैं। उससे उबरने के लिए ध्यान एक ऐसा माध्यम है, जिससे तन को स्वस्थ और मन को स्वच्छ रखा जा सकता है।
                वे देसंविवि के मृत्युजंय सभागार में आयोजित ध्यान की विशेष कक्षा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विकृत मानसिकता से उबरने का सबसे सरल व सुगम अभ्यास का नाम है ध्यान। ध्यान से जीवनी शक्ति व जीवन शैली, दोनों तरह की समस्याओं से निजात पाया जा सकता है। जबकि आज लोग अपने भौतिक जीवन में इतने उलझे हुए हैं कि उन्हें ध्यान जैसी महत्त्वपूर्ण पद्धति का ध्यान ही नहीं है। उन्होंने कहा कि ध्यान नवीन संरचना को जन्म देने के साथ ही विचारों एवं भावनाओं को भी स्वस्थ्य बनाता है। यह हमारे जीवन के नवनिर्माण की प्रक्रिया है जो चेतना को शुद्ध बनाने के साथ उसके अस्तित्व को भी पवित्र रखती हैै।
                उन्होंने कहा कि जीवन के उच्चतम शिखर पर पहुँचने के लिए हिमालय और सूर्य एक प्रेरणावान स्रोत है। हिमालय मनुष्य को सर्वोच्च के साथ जुड़ने की बात सिखाता है। कहा कि हिमालय की तरह जीवन में आने वाले कष्ट-कठिनाइयों से अडिग रहते हुए अपनी प्रगति के पथ पर चलते रहना चाहिए। इस अवसर पर श्रद्धेय डॉ. पण्ड्या ने विद्यार्थियों को हिमालय पर उदय होते हुए स्वर्णिम सूर्य का ध्यान में गोता लगवाया। इस अवसर पर उपस्थित लोग ध्यान का समय पूरा होने के बाद भी ध्यान-साधना में मग्न रहे।
                इससे पूर्व संगीत विभाग के गायकों ने ‘उठो सूर्य की तरह गगन में बनकर प्रकाश छा जाओ ...’’ गीत को सितार, वाइलिन आदि वाद्ययंत्रों से प्रस्तुत कर उपस्थित छात्र-छात्राओं, शिक्षक-शिक्षिकाओं, देसंविवि व शांतिकुंज के अनेक कार्यकर्त्ता को उल्लसित किया। इस अवसर पर कुलपति श्री शरद पारधी, प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव श्री संदीप कुमार सहित समस्त विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर्स, विद्यार्थी अािद उपस्थित रहे।


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