Published on 2018-09-09 JAIPUR

योग से होती है पवित्रता,
आनन्द और आत्मबल की प्राप्ति
जीवन के लिए योग

  • योगाथन में ७००० लोगों की भागीदारी
  • प्रदर्शनी, योग ग्राम का मॉडल
  • यौगिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • दीपयज्ञ
  • मुख्य वक्ता - डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी, देसंविवि

जयपुर। राजस्थान
योग साधना का उद्देश्य अपने दृष्टिकोण में परिवर्तन कर सार्थक जीवन जीने की दिशा में अग्रसर होना। पद, प्रतिष्ठा केवल बाहरी सम्पन्नता दिला सकते हैं, लेकिन जब तक आंतरिक पवित्रता और आत्मबल का विकास नहीं होता, जीवन में सुख-शांति नहीं आ सकती।
 
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने जयपुर के महाराणा प्रताप आॅडिटोरियम में आयुष मंत्रालय, भारत सरकार एवं गायत्री परिवार द्वारा २१ से २३ जुलाई की तारीखों में आयोजित योग महोत्सव को संबोधित करते हुए योग की अवधारणा इन शब्दों के साथ स्पष्ट की। योग महोत्सव की विषयवस्तु 'जीवन के लिए योग' थी।
 
मुख्य अतिथि डॉ. एस.एस. कोठारी लोकायुक्त राजस्थान एवं विशिष्ट अतिथि श्री पी.सी. बेरवाल, सचिव राजस्थान लोकसेवा आयोग, डॉ. ईश्वरवासव रेड्डी निदेशक मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, डॉ. ईश्वर एन. आचार्य, निदेशक केन्द्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद एवं श्री घनश्याम पालीवाल, प्रभारी गायत्री परिवार राजस्थान थे।
 
योग महोत्सव का शुभारंभ योगाथन से हुआ। इसमें भाग लेते हुए ७००० प्रतिभागियों ने जवाहर नगर टी पॉइण्ट से जवाहर कला केन्द्र तक दौड़ लगाई।

तीन दिवसीय योग महोत्सव में अनेक विशेषज्ञों के चिंतन और विचारों का हजारों लोगों को लाभ मिला। जयपुर सहित योग से सम्बद्ध देश के ३० संस्थानों ने इसमें भाग लिया। शांतिकुंज द्वारा विशाल योग प्रदर्शनी लगाई गर्इं और योग ग्राम का मॉडल प्रदर्शित किया गया।

तमिलनाडु निवासी ९९ वर्षीय योगिनी नम्मल अम्मा का योग सत्र आकर्षण का केन्द्र रहा। देव संस्कृति विवि. के पूर्व छात्रों द्वारा नगर के समस्त विद्यालयों से सम्पर्क, उनकी यौगिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और दीपयज्ञ अपने आप में अद्वितीय था।

यह राजस्थान में आयोजित प्रथम योग महोत्सव था, जिसे आयुष मंत्रालय ने 'योगक्रांति' के लिए अद्भुत कार्यक्रम बताया।


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