Published on 2018-09-12 BHOPAL
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नर्मदा की मिटटी से बनी गणेश प्रतिमाएं गायत्री परिवार की ओर से उपलब्ध कराए जाएगी। यह अनूठी पहल की शुरुआत की है अखिल विश्व गायत्री परिवार ने। गणेश चतुर्थी आने में अब महज एक सप्ताह बाकी है। ऐसे में कलाकार भगवान गणेश जी की प्रतिमाएं तैयार करने में जुट गए हैं। 13 सितंबर को घर-घर में गजानन विराजमान किए जाएंगे। ऐसे में मिट्टी के गणपति बनाने के लिए विभिन्ना सामाजिक संगठन भक्तों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। अखिल विश्व गायत्री परिवार ने भी लोगों को मिट्टी के गणपति उपलब्ध कराने की बीड़ा उठाया है। एमपी नगर स्थित गायत्री शक्तिपीठ में लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुक करने के लिए मिट्टी से गणपति बनाने का प्रशिक्षण लोगों को दिया जा रहा है।कुछ ज्योतिषाचार्यों की माने तो शास्त्रों के मुताबिक मिट्टी को सबसे अधिक पवित्र माना जाता है। ऐसे में मिट्टी के गणपति की घरों व झांकियों में स्थापित करना विशेष फलदायी है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि पीओपी की प्रतिमाएं पूजा योग्य नहीं होती। क्योंकि इसमें कई तरह के केमिकलों व जहरीले रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। पीओपी की मूर्तियां पर्यावरण को प्रदूषित करती हैं, क्योंकि तालाबों में विसर्जन के बाद यह घुलती नहीं। वहीं केमिकल पदार्थों के प्रभाव से जलीय जीव मर जाते हैं। गायत्री परिवार के द्वारा किसी भी प्रकार के केमिकल से रहित, नर्मदा नदी की मिट्टी से बनी इन मूर्तियां को श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए पीओपी की मूर्तियों के बजाय ईकोफ्रेंडली मिट्टी की मूर्तियां ही विराजमान कराने की अपील की जाएगी।


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