Published on 2018-09-21 BURHANPUR

बुरहानपुर। मध्य प्रदेश
गणेशोत्सव के प्रति लोगों की गज़ब की आस्था है। लेकिन सुविधा और सुंदरता की होड़ में प्लास्टर आॅफ पेरिस से बनी, विषैले रंगों से रंगी मूर्तियाँ जलस्रोत, ज़मीन, वायु सभी को प्रदूषित कर रही हैं। ऐसी आस्था किस काम की, जो जीवन के लिए संकट खड़ा करे?
गायत्री परिवार के नैष्ठिक परिजन निरंतर ऐसे उपाय ढ़ूँढ़ और अपना रहे हैं, जिससे आस्था तो बनी रहे, लेकिन पर्यावरण भी सुरक्षित रहे। इसी क्रम में बुरहानपुर शाखा ने गणेशोत्सव मनाने का एक नया उपाय अपनाया है :-

पर्यावरण के अनुकूल
आस्था संवर्धन के क्रम
गणेश स्थापना- विसर्जन का विकास

  • मिट्टी भरा गमला लीजिए। उसमें बेल वृक्ष के दो बीज डालिए। उसे कुछ मिट्टी से ढक दीजिए।
  • इसी गमले में माँ नर्मदा की पावन मिट्टी से बने बनी गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना कीजिए। गमले में दूर्वा भी रोप दीजिए।
  • १० दिनों तक श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश की पूजा- आराधना कीजिए। अंतिम दिन भगवान गणेश का जलाभिषेक कर उन्हें इसी गमले में विसर्जित कर दीजिए।
  • कुछ दिनों बाद बेल के बीज अंकुरित हो जाएँगे। उन्हें गणेश जी का ही रूप मानकर २ वर्ष तक गमले में ही विकसित करते रहिए।
  • जब वह ३- ५ फीट से बड़ा हो जाए तो उसे किसी शिवालय में जाकर रोप दीजिए। भगवान गणेश की इस जीवन्त प्रतिमा के पत्रों का अभिषेक जब भगवान भोलेनाथ पर होगा तो आपकी भक्ति का पुण्य अनन्त गुना हो जाएगा।


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