Published on 2018-09-26
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डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी की उपस्थिति में लेस्टर में सम्पन्न हुआ भव्य समापन समारोह
७ से १० अक्टूबर १९९३ इंग्लैण्ड वासियों के सौभाग्य एवं आनन्द तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के इतिहास के अविस्मरणीय दिन हैं। इन्हीं तिथियों में इंग्लैण्ड के लेस्टर शहर में विदेशी धरती पर पहला अश्वमेध महायज्ञ आयोजित हुआ। यह परम वंदनीया माताजी का प्रथम विदेश प्रवास था। इन्हीं अलौकिक स्मृतियों को सँजोये वहाँ के नैष्ठिक कार्यकर्त्ताओं ने परम वंदनीया माताजी के पदार्पण का रजत जयंती वर्ष मनाते हुए याद किया। इस उपलक्ष्य में अलग- अलग नगरों में कई कार्यक्रम आयोजित हुए। जिस प्रेम, आत्मीयता, परमार्थ परायणता, सेवा- सक्रियता का संदेश लेकर प.वं. माताजी पधारी थीं, इन कार्यक्रमों के माध्यम से वही संदेश नये लोगों तक, नवोदित पीढ़ी तक पहुँचाने के अथक प्रयास किए गए।
लेस्टर अश्वमेध रजत जयंती वर्ष के कार्यक्रम सम्पन्न कराने शांतिकुंज से प्रो. विश्वप्रकाश त्रिपाठी, श्री पुष्कर राज एवं श्री हरिप्रसाद चौधरी की टोली १६ मई को इंग्लैण्ड के लिए रवाना हो गई थी। उसके बाद १९ मई से कार्यक्रम शृंखला आरंभ हुई। इनमें पूरे इंग्लैड के कार्यकर्त्ता, संस्कृति एवं समाज के प्रति समर्पित श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यूरोप के कई अन्य देशों के श्रद्धालु भी इनमें पहुँचे। रजत जयंती समारोह शृंखला का समापन अश्वमेध यज्ञ स्थल पर विशाल यज्ञीय कार्यक्रम के साथ हुआ।

समापन समारोह: २४ कुण्डीय यज्ञ एवं यूथ कन्वेन्शन
मातृ स्मृति रजत जयंती वर्ष का समापन दिनांक १ एवं २ सितम्बर को लेस्टर में आयोजित २४ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ एवं यूथ कन्वेंशन के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी विशेष रूप से पहुँचे थे। प्रजापति हॉल में आयोजित २४ कुण्डीय यज्ञ में हजारों कार्यकर्त्ता- श्रद्धालुओं ने भाग यिला। स्वीडन से संजय जी १४ परिजनों के साथ आये। रजत जयंती समारोह ने गुरुदेव- माताजी की महान चेतना से जुड़कर जीवन सार्थक करने की प्रेरणा दी।

यूथ कन्वेन्शन :: गायत्री चेतना केन्द्र ,, १६ रेण्डल रोड में आयोजित यूथ कन्वेन्शन की विषयवस्तु थी 'अवेक एण्ड इन्स्पायर'। इस विषय पर डॉ. चिन्मय जी के उद्बोधन ने बच्चों- युवाओं को जीने का अर्थ बताया, उनकी अनेक समस्याओं का समाधान सुझाया। उन्होंने कहा कि यौवन की सार्थकता महापुरुषों का अनुगमन करने और समाज को सही दिशा देने में है।

इस कन्वेन्शन में गायत्री परिवार द्वारा लेस्टर, कोवेंट्री, बरमिंघम, आॅक्सफोर्ड, स्वीडन आदि अनेक स्थानों पर चलाई जा रही बाल संस्कारशालाओं के बच्चों ने अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं पावर पॉइण्ट प्रेज़ेण्टेशन से उन्होंने गायत्री मंत्र, ध्यान, प्राणायाम, योग, व्यसन, संस्कार, साइंस आॅफ साउण्ड जैसे विषयों का बड़ा प्रभावशाली प्रतिपादन किया। उनकी प्रज्ञागीतों की प्रस्तुति मंत्रमुग्ध कर देने वाली थी। डॉ. चिन्मय जी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना के साथ भरपूर उत्साहवर्धन किया।

समापन समारोह की कुछ विशिष्टताएँ
भव्य स्वागत
प.पू. गुरुदेव, प.वं. माताजी की चरण पादुकाओं एवं उनकी प्रखर प्राण चेतना के प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय जी को अपने बीच पाकर इंग्लैण्ड वासी गद्गद थे। उनका भव्य स्वागत किया।

विशेष प्रस्तुति : सोवर वेली कॉलेज (अश्वमेध आयोजन स्थल) में परम वंदनीया माताजी के आगमन की स्मृतियों को हृदय में सँजाये परिजनों ने वीडियो क्लिप्स्स, उनके गाये भजन के माध्यम से प्रस्तुत किया। उस समय छोटे- छोटे किशोर थे, वे आज मिशन की बड़ी जिम्मेदारियों को सँभालते हुए गौरव का अनुभव कर रहे थे।
पार्षद पधारे :: रजत जयंती समारोह में स्थानीय पार्षद श्री रतीलाल गोविंद पधारे। बड़ी श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में भाग लिया और युगऋषि के विचारों को गति देने में पूरे- पूरे सहयोग का आश्वासन दिया।

कार्यकर्त्ता संगोष्ठी : दूर- दूर से आये कार्यकर्त्ताओं की गोष्ठी हुई। शांतिकुंज प्रतिनिधि ने जनसंपर्क बढ़ाने एवं गुरुदेव के विचारों को जन- जन तक पहुँचाने की हृदयस्पर्शी प्रेरणा दी। जन- जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष यूके में १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन हो, ऐसा सुझाव उन्होंने दिया।


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