Published on 2018-09-28
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माँरिशस में आयोजित ग्यारवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में डॉ. रत्नाकर नराले को मिला 'विश्व हिन्दी सम्मान'

हिंदी, संस्कृत, भारतीय संगीत और भारतीय संगीत संस्कृति के विश्वव्यापी प्रसार के कार्य कर रहे हैं।

मिशन के सक्रिय परिजन कनाडा वासी प्रवासी भारतीय 'डॉक्टर रत्नाकर नराले' को मॉरीशस में संपन्न ११वें विश्व हिंदी सम्मेलन में 'विश्व हिंदी सम्मान' से पुरस्कृत किया गया। इस पुरस्कार को हिंदी का नोबिल पुरस्कार कहा जाता है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से यह पुरस्कार माननीया विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज द्वारा डॉ. निराले को ५० वर्ष तक की गई उनकी हिंदी एवं संस्कृत साहित्य की सेवाओं के नाते प्रदान किया गया। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका एवं कनाडा में यह पुरस्कार पाने वाले एकमात्र व्यक्ति रहे।

उल्लेखनीय है कि डॉ. रत्नाकर को कनाडा सरकार की ओर से वहाँ के १५०वें स्वतंत्रता जयंती समारोह में 'हिंदी रत्न' पुरस्कार से भी अलंकृत किया जा चुका है।
उनका जन्म (सन् १९४२) नागपुर (भारत में) हुआ। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से बी.एससी., पुणे विश्वविद्यालय से एम.एससी., आईआईटी- खड़गपुर एवं कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय नागपुर से पीएच.डी. परीक्षाएँ पास कीं। पिछले ५० वर्षों से कनाडा में रहकर शिक्षक की भूमिका निभाते हुए हिंदी संस्कृत एवं भारतीय संगीत को बड़े प्रभावी ढंग से प्रवासी भारतीयों में तथा विदेशी जिज्ञासुओं के बीच लोकप्रिय बनाने की सेवा- साधना निष्ठापूर्वक कर रहे हैं।

डॉ. नराले वर्तमान में प्रोफेसर हिंदी रायर्सन विवि., टोरंटो कनाडा में हैं। कनाडा के संस्कृत- हिंदी रिसर्च इंस्टीट्यूट, पुस्तक भारती तथा संस्कृत विद्या परिषद टोरंटो के अध्यक्ष भी हैं। टोरंटो के अनेक विश्वविद्यालयों में सेवा दे चुके हैं। सन् १९८९ से वे 'पुस्तक भारती' नामक वेबसाइट के माध्यम से बिना मूल्य हिंदी शिक्षा की सुविधा विश्वभर के तमाम हिंदी प्रेमियों को दे रहे हैं। वे हिंदी, संस्कृत, भारतीय संगीत और भारतीय संगीत संस्कृति के विश्वव्यापी प्रसार के लिए उत्तम शोधपूर्ण उत्कृष्ट साहित्य का प्रकाशन सेवा भाव से कर रहे हैं। उनकी ३३ शोधात्मक- शिक्षण पुस्तकें वेबसाइट www.amazon.com पर उपलब्ध हैं।

उक्त पुस्तकों में अंग्रेजी भाषा तथा प्रवासी भारतीयों के बच्चों को हिंदी सिखाने वाली पुस्तकें, संस्कृत सिखाने वाली पुस्तकें एवं पतंजलि योग दर्शन पर तो हैं ही, कुछ संगीत एवं छन्द विद्या सहित दुर्लभ ग्रंथ भी हैं। जैसे संगीत श्री रामायण, संगीत श्री कृष्णायन, संगीत गीता दोहावली, संगीत श्री सत्यनारायण कथा आदि। इनमें विभिन्न छंदों के गुण- नियम एवं विभिन्न भागों की स्वरलिपियाँ भी दी गई हैं। भारतीय विश्वविद्यालयों के शोध विद्यार्थियों के लिए उनमें भरपूर सामग्री मिल सकती है। शोधार्थियों को कनाडा से सहायता भी दी जा सकती है। इच्छुक गण उनके ई- मेल नंबर marale@yahoo.ca  पर संपर्क भी कर सकते हैं।

युगसृजेता शिक्षक के सेवानिवृत्ति समारोह में सृजनशील प्रतिभाएँ सम्मानित
ऐसे कार्यक्रम सामाजिक समरसता बढ़ाने के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं। - श्री कौशिक, डिस्ट्रिक्ट जज

बयाना, भरतपुर। राजस्थान
गायत्री परिवार बयाना के नशामुक्ति अभियान प्रभारी श्री बहादुर सिंह गुर्जर ने १९ अगस्त को अपने अध्यापक पद से सेवानिवृत्त होने के उपलक्ष्य में 'सर्वजातीय प्रतिभा सम्मान समारोह' का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में ११०० पेड़ लगाने वाले श्री लाल गुर्जर, विशिष्ट उत्कृष्ट सेवा देने वाले २० प्रधानाचार्य, अपने सास- ससुर की सेवा का आदर्श प्रस्तुत करने वाली १० बहिनें, नशामुक्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले २४ कार्यकर्त्ता, २४ जोड़े आदर्श सेवाभावी दम्पति और ज्ञानयज्ञ के लिए समर्पित २५ भाइयों का सम्मान किया गया। समारोह में बोर्ड की परीक्षा में ९०त्न से अधिक अंक लाने वाले छात्रों एवं ८५त्न से अधिक अंक लाने वाली नगर की छात्राओं को भी सम्मानित किया गया।

सभी सम्मानित सदस्य को प्रशस्ति पत्र के अलावा दो- दो पौधे उपहार स्वरूप प्रदान किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री गुलाब चंद शर्मा सेवानिवृत्त सेशन जज, जयपुर की, श्री सतीश चंद्र कौशिक डिस्ट्रिक्ट जज फैमिली कोर्ट अलवर तथा सोमदत्त गुप्ता वरिष्ठ चिकित्सक विशिष्ट अतिथि थे। श्री सतीश चंद्र कौशिक ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम सामाजिक समरसता बढ़ाने के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं।


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