Published on 2018-10-07
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सामूहिक श्राद्ध-तर्पण और गायत्री महायज्ञ का आयोजन 

जयपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से रविवार को मुहाना मंडी स्थित ओम तंवर फल-सब्जी ब्लॉक में सामूहिक श्राद्ध-तर्पण और गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी से आई विद्वानों की टोली ने श्राद्ध तर्पण सम्पन्न करवाया। शांतिकुंज प्रतिनिधि ताराचंद पंवार ने कहा कि श्रद्धा ही पितृों का भोजन है। श्रद्धा भाव से हम पितृजनों को जो भी अर्पित करते हुए, उन्हें अवश्य पहुंचता है। प्रारंभ में वेदमाता, गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और भगवती देवी शर्मा का पंचोपचार पूजन किया। दिनेश मरकाम और यशवन ने प्रज्ञा गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद श्राद्ध-तर्पण की क्रियाएं प्रारंभ हुई। श्रद्धालुओं ने पूर्व दिशा की और मुंह कर दाहिना घुटना जमीन पर लगाकर, अनामिका अंगुली में कुशा की पवित्री धारण कर अपने नाम और गौत्र का उच्चारण के साथ श्राद्ध-तर्पण का संकल्प लिया। हाथ में श्वेत चंदन, जौ, तिल, चावल, पुष्प और तुलसीदल रखकर  देवताओं का आह्वान किया। आह्वावित देवतओं ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, प्रजापति, संवत्सर, गंधर्व वेद, पुराण आदि को को कुश का आसन देकर अंगुलियों के अग्रभाग से देवतीर्थों का दूध-चावल-पुष्प मिश्रित जल अर्पित किया गया। ऋषि तर्पण में मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, वशिष्ठ, नारद, भृगु, प्रचेता का आह्वान कर तर्पण किया गया। दिव्य मनुष्य तर्पण के अन्तर्गत उत्तर दिशा की ओर मुंह करके जनेऊ और गमछे को माला की भांति गले में धारण कर सीधे बैठ कर मंत्रों के साथ दिव्य मनुष्यों के लिए प्रत्येक को दो-दो अंजलि जौ सहित जल सबसे छोटी अंगुली के मूल भाग से अर्पण से अर्पित किया गया। इसके अन्तर्गत सनक, सनंदन, सनातन, कपिल का नाम लेकर तर्पण किया गया। दिव्य पितृ तर्पण में दोनों हाथ के अनामिका में धारण किए पवित्री और त्रिकुशा को निकाल कर हाथ की तर्जनी अंगुली में नई पवित्री धारण कर  कुशा के मूल और अग्रभाग को दक्षिण की ओर करके  अंगूठे और तर्जनी के बीच में रखते हुए दक्षिण दिशा की ओर मुंह कर बाएं घुटने को जमीन पर लगाकर जनेऊ को दाएं कंधे पर रखकर जल में काला तिल मिलाकर पितृतीर्थ से यानि अंगुठा और तर्जनी के मध्यभाग से दिव्य पितरों के लिए  मंत्रों के साथ तीन-तीन अंजलि जल अर्पित किया गया। प्रारंभ में कव्य, सोम, यम, अर्यमा, अग्नि आदि के निमित्त तर्पण किया गया। यम तर्पण के क्रम में  14 यमों के निमित्त तर्पण किया गया। सबसे आखिर में घर के पितरों का आह्वान किया गया। यजमानों ने अपने पितृगणों का नाम-गोत्र का उच्चारण करते हुए प्रत्येक के लिए तीन-तीन अंजलि तिल सहित जल अर्पित किया।

परिजनों का नाम-गोत्र लेकर दी जलांजलि: पिता, माजा परदादा, परदादी,नाना, नानी सहित दिवगंत हुए पितृों का नाम लेकर तर्पण किया गया।  तर्पण के बाद सभी ने प्रार्थना की कि ब्रह्माजी  से लेकर कीटों तक जितने जीव हैं, वे तथा देवता, ऋषि, पितर, मनुष्य और माता, नाना आदि पितृगण ये सभी तृप्त हों। मेरे कुल की बीती हुई करोड़ों पीढिय़ों में उत्पन्न हुए जो-जो पितर ब्रह्मलोक पर्यन्त सात द्वीपों के भीतर कहीं भी निवास करते हों उनकी तृप्ति के लिए मेरा दिया हुआ यह तिलमिश्रित जल उन्हें प्राप्त हो। जो मेरे बांधव न रहे हों, जो इस जन्म में या किसी दूसरे जन्म में मेरे बांधव रहे हों वे सभी मेरे दिए हुए जल से तृप्त हो जाएं। 

फोटो हवन

गायत्री यज्ञ में अर्पित की आहुतियां: 

श्राद्ध-तर्पण के बाद गायत्री यज्ञ भी हुआ।  षटकर्म करने के बाद सभी देवी-देवताओं का आह्वान कर सोडशोपचार पूजन किया गया। इसके बाद गायत्री और महामृत्युंजय मंत्र के साथ आहुतियां अर्पित की गई। पितृजनों के निमित्त विशिष्ट मंत्रों के साथ आहुतियां अर्पित की गई। आरती, शांति अभिसींचन और जयघोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

सभी व्यवस्थाएं रही निशुल्क:

संयोजक प्रभातीलाल सैनी ने बताया कि   सामूहिक श्राद्ध-तर्पण श्रद्धालुओं को पूजा-सामग्री और श्राद्ध-तर्पण की सामग्री कार्यक्रम स्थल पर निशुल्क उपलब्ध करवाई गई। सह आयोजक जयपुर फल-सब्जी थोक विके्रता संघ के अध्यक्ष राहुल तंवर ने बताया कि श्राद्ध तर्पण में मंडी के व्यापारियों ने परिवार सहित भाग लिया।


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