Published on 2018-10-08 HARDWAR
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हरिद्वार 5 अक्टूबर।

हौसले बुलंद हो, तो सफलता अवश्य मिलती है। इसके लिए पारिवारिक पृष्ठभूमि ज्यादा मायने नहीं रखती। यह कहना है माउंट एवरेस्ट में तिरंगा फहराने वाली प्रथम भारतीय महिला पद्मश्री बिछेन्द्री पाल का।

                वे आज देव संस्कृति विश्व विद्यालय व गायत्री विद्यापीठ शांतिकुंज के विद्यार्थियों के बीच पहुँची थी। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी के छोटे से गाँव से लेकर माउंट एवरेस्ट में तिरंगा लहराने के बीच काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पर मैंने अपने हौसले बुलंद रखे। मेरे बड़े सपने के सामने आर्थिक कमजोरी बौने हो गये। टाटा स्टील कंपनी के साथ जुड़ने के बाद सैकड़ों लोगों को बड़े सपने देखना सिखाया और उसे पूरा करने के लिए मेहनत करना। मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। पद्मश्री सुश्री पॉल नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत करीब 1500 किमी की दूरी तय करते हुए गंगा में राफ्टिंग करते हुए उत्तराखण्ड के हरिद्वार से लेकर बिहार के पटना तक जायेंगी। इस बीच लोगों को गंगा को स्वच्छ रखने, पौधारोपण के प्रति जागरुक करेंगी।

                नमामि गंगे अभियान, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी श्री रोजी अग्रवाल ने गंगा को स्वच्छ रखने के विविध उपायों की जानकारी दी। इस अवसर पर नमामि गंगे टीम ने विद्यार्थियों को गंगा को स्वच्छ रखने हेतु जन जागरण करने के लिए प्रेरित किया। इससे पूर्व विद्यापीठ परिवार ने पद्मश्री सुश्री पॉल को उपवस्त्र ओढ़ाकर व पुष्प वर्षा कर सम्मानित किया।                इस दौरान नमामि गंगे अभियान की चालीस सदस्यीय टीम के अलावा विद्यापीठ की व्यवस्था मंडल की प्रमुख श्रीमती शेफाली पण्ड्या, प्रधानाचार्य श्री सीताराम सिन्हा, शिक्षक-शिक्षिकाएँ सहित समस्त विद्यापीठ परिवार उपस्थित थे। देसंविवि के प्रतिकुलपति से मिलेपद्मश्री सुश्री बिछेन्द्री पॉल देव संस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या से भेंट की। इस दौरान दोनों ने गंगा की अविरलता, स्वच्छता पर चर्चा की। डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने बताया कि अखिल विश्व गायत्री परिवार ने सन् 2011 से निर्मल गंगा जन अभियान प्रारंभ किया। इसके अंतर्गत प्रथम तीन चरण का कार्य पूरा हो गया है। गायत्री परिवार व देसंविवि परिवार के लाखों युवा नर-नारी इस अभियान में तन, मन, धन से जुटे हैं। प्रतिकुलपति ने पद्मश्री सुश्री पॉल को युगसाहित्य आदि भेंटकर सम्मानित किया।


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