Published on 2018-10-08
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श्रद्धेय डॉ. प्रणव जी एवं डॉ. चिन्मय जी ने किया भूमिपूजन

कैलीफोर्निया प्रांत में मारिपोसा काउण्टी स्थित यशोमाइट नेशनल पार्क के समीप अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा एक दिव्य साधना केन्द्र बनाया जा रहा है। श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी एवं डॉ. चिन्मय जी ने १७ सितम्बर को इस साधना केन्द्र का भूमिपूजन किया।

अपनी ६४० एकड़ भूमि पर साधना केन्द्र का निर्माण करा रहे श्री किरण पटेल के अलावा वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्री महेश भट्ट एवं शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री राजकुमार वैष्णव ने भी भूमिपूजन के कार्यक्रम में भाग लिया। भूमि पूजन के समय स्थानीय रियल स्टेट एजेंट मि. कैरी एवं जैक्लीन ग्रिफिथ के साथ उपस्थित थे। उन्होंने ही पहाड़ की चोटी पर हेलिपैड बनाया।

गायत्री चेतना केन्द्र, लॉस एंजिल्स से सभी परिजन चार्टर्ड हैलीकॉप्टर से यशोमाइट पहुँचे। वहाँ पूरे क्षेत्र का निरीक्षण और फिर भूमिपूजन किया। श्रद्धेय डॉ. साहब ने इसे दिव्य साधना स्थली, यज्ञशाला के साथ कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित करने की प्रेरणा दी।  श्री किरण पटेल ने वहाँ विशाल गोशाला एवं श्रीराम स्मृति उपवन, वनौषधि उद्यान भी लगाने की जानकारी दी।

प्रस्तावित योजनाएँ
• साधना केन्द्र           • यज्ञशाला
• प्रशिक्षण केन्द्र         • गौशाला
• श्रीराम स्मृति उपवन • वनौषधि उद्यान

अमेरिका और कनाडावासी इस केन्द्र के निर्माण में उदारतापूर्वक सहयोग करें। - श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी

दिव्यता और भव्यता की झलक-झाँकी• यशोमाइट नेशनल पार्क यशोमाइट फॉल, यशोमाइट वैली, हाफ डोम, विश्व की सबसे बड़ी ग्रेनाइट की चट्टान, ग्रेनाइट मोनोलिथ-एल कैप्टन एवं मिरर लेक के लिए विश्व प्रसिद्घ है।

  • २०१२ में यहाँ श्रद्धेय डॉ. साहब की मुख्य उपस्थिति में अमेरिका के चुने हुए ४० युवाओं का अन्त:ऊर्जा जागरण शिविर आयोजित हुआ था। उससे प्रेरित होकर मार्च २०१६ में श्री किरण पटेल के मन में एक साधना केन्द्र बनाने का संकल्प उभरा। इसके लिए ६४० एकड़ भूमि खरीदी।
  • ३२०० फीट की ऊँचाई पर बन रहा यह साधना केन्द्र अत्यंत रमणीक है। दो ऊँचे-ऊँचे पर्वत और वहाँ बहने वाला झरना मन को आह्लादित कर देता है। वहाँ से यशोमाईट के सभी दर्शनीय स्थल दिखाई देते हैं। ठंड के दिनों में वहाँ पर्वतीय शिखर हिमाच्छादित हो जाते हैं। जिन्होंने गायत्री चेतना केन्द्र, मुनस्यारी के दर्शन किए हैं, जहाँ से हिमालय के पंचाचूली शिखर के दिव्य दर्शन होते हैं, उन्हें यशोमाइट में बन रही इस साधना स्थली में भी वैसी ही अनुभूतियाँ होंगी। इसीलिए इसे पश्चिमी देशों का
  • 'मुनस्यारी' भी कहा जा सकता है।
  • स्थानीय प्रशासन भरपूर सहयोग कर रहा है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक स्थानीय प्रशासन द्वारा २ लेन रोड बनाने एवं पर्वत शिखर की सफाई करने का काम आरंभ हो चुका है।


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