Published on 2018-10-15 HARDWAR

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के मुख्य सभागार में देश-विदेश से नवरात्र साधना हेतु आये साधकों को संबोधित करते हुए देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि साधना से सिद्धि तभी मिलती है, जब साधक के अंदर परिवर्तन हो। आंतरिक परिवर्तन के लिए एक लक्ष्य निर्धारित कर तदनुसार संकल्प लें और फिर मनोयोगपूर्वक उस दिशा में एकाग्रता के साथ बढ़े, तभी साधना सच्चे अर्थों में फलीभूत होती है। उन्होंने कहा कि आंतरिक परिवर्तन से साधक का दृष्टिकोण सकारात्मक होता है। जिससे वे अच्छे व बुरे कर्मों का अवलोकन कर पाता है।


डॉ. चिन्मय ने कहा कि आज जितनी भी समस्याएँ बाहर की दिखाई पड़ रही है, उससे ज्यादा मनुष्य के अंदर है। जब तक मनुष्य अपने अंदर की कमजोरी सहित विभिन्न कुकर्मों (आचरण) को बाहर नहीं कर देता, तब तक उन्हें यथोचित सफलता नहीं मिल सकती और न ही उसका व्यक्तित्व विकास होगा।
                इस अवसर पर शांतिकुंज व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्र, डॉ. ओपी शर्मा सहित देश-विदेश से नवरात्र साधना में जुटे साधकगण उपस्थित रहे।


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