Published on 2018-10-16 HARDWAR

जीवन साधना में सफल होने का मार्ग आत्म संयम ः डा. पण्ड्या

साधकों ने माता की आरती कर माँगी भक्ति करने के लिए शक्ति
 हरिद्वार 15 अक्टूबर।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि जीवन साधना में सफल होना हो, तो उन्हें आत्म संयम रखना आवश्यक है। संयम से ही साधनाएँ सधती व फलती हैं। चंचल मन को संयम के माध्यम से काबू में रखा जा सकता है।              

वे देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में नवरात्र साधना में जुटे साधकों का मार्गदर्शन कर रहे थे। उन्होंने श्रीमद् भगवद्गीता के विभिन्न उद्धरणों के माध्यम से ध्यान साधना के स्वर्णिम सूत्रों की व्याख्या की। कुलाधिपति ने कहा कि ध्यान साधना से परमात्मा से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त होता है और इससे आत्म शांति की भी प्राप्ति होती है, जिसकी आज सबसे ज्यादा आवश्यकता है। नवरात्र के दिनों में मनोयोगपूर्वक की साधना से आत्म शांति व विभिन्न प्रकार के कष्ट-कठिनाइयों से भी मुक्ति मिल सकती है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्म के लोग अपने धर्मानुसार संयम के साथ साधना करते हैं और अपने इष्ट की कृपा पाने के लिए प्रयासरत रहते हैं।               

कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने कहा कि पूजा, जप, ध्यान, अनुष्ठान आदि जो भी क्रियाएँ हैंं, उनका मूल उद्देश्य परमात्मा के प्रति अपनी निष्ठा को गहरा करना है। ज्यों-ज्यों निष्ठा गहरी होती जाती है, त्यों-त्यों परमात्मा के प्रति प्रेम भाव बढ़ता जाता है। यही प्रेम भाव धीरे-धीरे परिपक्व होकर भक्ति का रूप धारण कर लेता है। उन्होंने कहा कि जो आत्मा द्वारा स्वीकृत समाज के नैतिक नियमों का पालन करता रहता है, आदर्शवाद का व्यवहार करता है, वह समाज की दृष्टि में ऊँचा उठ जाता है। समाज उससे प्रेम करने लगता है। ऐसे भाग्यवान व्यक्ति जहाँ रहते हैं उसके आसपास का वातावरण स्वर्गीय भावों से भरा रहता है। कटुता और कलुष का उसके समीप कोई स्थान नहीं होता। जिस प्रकार का निर्विघ्न और निर्विरोध आनन्द परमात्मा के मिलन से मिलता है, उसी प्रकार का आनंद आदर्शवाद के निर्वाह में प्राप्त होता है।              


इससे पूर्व संगीत विभाग के भाइयों ने ‘हमें भक्ति दो माँ, हमे शक्ति दो माँ... ’ गीत से उपस्थित साधकों को सर्वशक्तिमान माता की भक्ति में सराबोर कर दिया। समापन से पूर्व साधकों ने सामूहिक आरती कर माता से भक्ति, शक्ति की कामना की। इस अवसर पर कुलपति श्री शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव श्री संदीप कुमार सहित समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षक-शिक्षिकाएँ, विद्यार्थी के साथ देश के कोने से आये साधकगण उपस्थित रहे।


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