Published on 2018-10-18 HARDWAR

हरिद्वार १८ अक्टूबर।

नवरात्र साधना के अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिवार सामूहिक जप, तप कर रहा है। 'सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया...' के भाव से सर्वशक्तिमान माता की आराधना में जुटा है।

युवाओं व साधकों का मार्गदर्शन करते हुए कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि मनोयोगपूर्वक की गयी साधना से मन पवित्र होता है, तो वहीं चित्त की शुद्धि होती है। मन के भटकाव को रोकने में भी साधना एक कारगर उपाय है। साधना से विचार अच्छे होते हैं। भावनाएँ शुद्ध होती हैं। कुण्डलिनी का जागरण हो सकता है, इसके साथ ही और भी अनेक लाभ साधक को मिलते हैं। जीवन चेतना को नया आयाम मिलता है। तर्कशक्ति बेहतर होती है। कठिन परिस्थितियों में भी साधक की सहनशीलता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि साधना से किशोरों के मनोभाव सकारात्मक होते हैं। परिवार के प्रति दृष्टिकोण व मूल्यों के प्रति संवेदनशील होने लगते हैं। संयमित व संतुलित व्यवृहार के गुण आते हैं। गृहस्थी जीवन यापन करने वालों में परिवार के अन्य लोगों के प्रति आदर व सम्मान का भाव पैदा होते हैं। साथ ही सामाजिक व व्यावसायिक क्षेत्र में विकास की उत्कृष्ट अवस्था में पहुँचता है। निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है। कुलाधिपति ने कहा कि साधना से संकल्प दृढ़ होने लगता है। मनुष्य अपनी आकांक्षाओं व उम्मीदों परे हटकर संकल्प पूरा करने के लिए तत्पर रहता हैं। हरेक व्यक्ति अपने जीवन में कोई न कोई संकल्प लेते हैं। संकल्प पूरा करने के दौरान साधना मन को विचलित होने से बचाये रखता है। जिससे उसे इच्छित सफलता मिल जाती है।

इससे पूर्व कुलाधिपति ने दीप प्रज्वलन कर सर्वशक्तिमान माता से सर्वे भवन्तु सुखिनः .. के भाव से प्रार्थना की। पश्चात् सुमधुर संगीत से माता की आराधना की। जिसमें उपस्थित लोगों ने श्रद्धाभाव से सर्वशक्तिमान माता की प्रार्थना में भाग लिया। इस अवसर पर कुलपति श्री शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ.चिन्मय पण्ड्याजी, कुलसचिव श्री संदीप कुमार सहित देसंविवि, शांतिकुंज परिवार के अलावा विभिन्न राज्यों से आये साधक उपस्थित रहे।


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