Published on 2018-10-07 KANPUR NAGAR

वैज्ञानिक अध्यात्मवाद बदलेगा- प्रसवपूर्व देखभाल की अवधारणा 

दिनांक 07/10/2018 को GSVM मेडिकल कोलेज, कानपुर, उत्तर प्रदेश के डाक्टरों से खचाखच भरे ऑडिटोरियम में wwwcom 2018, FOGSI International सेमिनार का उद्घघाटन करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख श्रेद्ध्य डा० प्रणव पंड्या ने कहा की विज्ञान और अध्यात्म मिलकर प्रसवपूर्व देखभाल की अवधारणा में आमूलचूल परिवर्तन कर सकते है जो की गर्भस्थ माता एवं शिशु दोनों के हित के साथ साथ गुणोत्तर  नयी पीढी  के स्रजन द्वारा  देश के लिए ही नहीं मानवता लिए भी लाभदायक होगा | इस अवसर पर बोलते हुए श्री पंड्या जी ने बताया की वर्ष १९९८-९९ में विश्वव् स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा स्वस्थ व्यक्ति की परिभाषा में शारीरिक, मानसिक व् सामाजिक स्वास्थ के साथ साथ आध्यामिक शब्द जोड़ने के बाद संसार भर के लोगो का ध्यान, गर्भ में पल रहे शिशु के अध्यात्मिक विकास की ओर आकर्षित हुआ | उन्होंने बताया की गुरुदेव पंडित श्री रामशर्मा आचर्य कहते थे “ जो जैसा सोचता है वैसा बन जाता है “ | अत : गर्भवती माता के विचार / संस्कार और परिवारिक जनो का वातावरण जैसा  होगा, उनका प्रभाव उसके गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ेगा  | विज्ञानं द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि गर्भ में बच्चा सुन सकता है, मुस्कराता है, स्वप्न देखता है, स्वाद ले सकता है, गुस्सा आदि क्रियाये करता है | उन्होंने इस अवसर पर वैज्ञानिक प्रतिपादनों और शोध का विवरण देते हुए कहा की इस अवस्था में योग, आसन, प्राणायाम, जप, ध्यान, आहार एवं दैनिक स्वस्थ दिनचर्या आदि के माध्यम से बच्चे में मनचाहे गुणों को पैदा किया जा सकता है जिसके लिए गर्भवती माता के साथ साथ घर के अन्य सदस्यों को उपयुक्त माहौल व सहयोग करना होगा| डा ० गायत्री शर्मा , शांतिकुञ्ज, हरिद्वार ने अपने संबोधन के दौरान बताया की नए युग के निर्माण में महती भूमिका निभाने के लिए उच्चस्तरीय  गुणों से परिपूर्ण बच्चो को जन्म देने हेतु गायत्री परिवार , हरिद्वार द्वारा          “ आओ गढ़े संस्कारवान पीढी”  के नाम से एक अभियान चलाया जा रहा है जिसके माध्यम से गर्भवती माताओ  एवं अन्य संभंधित लोगो को उपयुक्त जानकारी, गर्भोत्सव संस्कार व गर्भवती माँ के जीवन स्तर में बदलाव के बारे में पूर्ण जानकारी व प्रशिक्षण दिया जाता है | गायत्री परिवार के इस कार्यक्रम से प्रभावित हो कर उत्तराखंड प्रान्त की सर्कार द्वारा वहां  कार्यरत आंगनवाड़ी  कार्यकर्ताओ एवं अन्य सम्बंधित  अधिकारियो को प्रशिक्षित किये जाने हेतु शांतिकुंज, हरिद्वार में सतत प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है | डा ० शर्मा ने उदहारण देते हुए बताया की जैसे कंप्यूटर में सॉफ्टवेर ( प्रोग्रामिंग ) को बदल कर हम उससे मनचाहा कार्य सम्पादित कर सकते है उसी प्रकार वैज्ञानिको की खोज के आधार पर मनुष्य के एपीजेनिटिक द्वारा जींस के जीनोटाइप व DNA के सीक्वेंस के बदले बिना भोजन, स्वस्थ दिनचर्या एवं वातावरण में बदलाव कर  गर्भ में पल रहे शिशु के गुणों में आमूलचूल परिवर्तन संभव है | इस अवसर पर उन्होंने बताया की अभी तक लोग मात्र IQ (Intelligence quotient) व EQ (Emotional quotient) की ही बात करते है पर अब SQ (spiritual quotient ) को भी महत्त्व दिया जाना आवश्यक है जिसके माध्यम से बच्चे में मानवीय एवं नैतिक गुणों का विकास एवं विभिन्न परिस्थियो पर विजय प्राप्त करने के गुणों नीव बन जाती है जो गर्भावस्था के दौरान  माँ की भावनाओ व विचारो पर निर्भर करता है  | डा ० श्रीमती जयदीप मेहरोत्रा, FOGSI की प्रेसिडेंट , ने  कहा की वर्तमान में उपलब्ध  आकड़ो के अनुसार भारत वर्ष में मधुमेह, मोटापा, प्रसवपूर्व मृत्यु की संख्या, विश्व के सभी देशो से अधिक है , जो की चिंता का विषय है | उन्होंने बताया की आज यह सिद्ध हो चुका है कि योग, प्राणायाम, ध्यान ,स्वस्थ संतुलित सात्विक आहार एवं स्वस्थ दिनचर्या द्वारा गर्भ में ही बच्चो के गुणों में परिवर्तन किया जा सकता है जिससे कुछ हद तक उक्त समस्यायों से निजाद भी पाई जा सकती है | गायत्री परिवार द्वार गर्भवती माताओ और गर्भस्थ शिशु के सर्वांगीण विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों की भरपूर सराहना करते हुए सभी डाक्टरों व् उपस्थित लोगो से इस सन्दर्भ में किये जा रहे प्रयसो को जन-जन तक पहुचाने की  अपील की , जिससे सभ्य,प्रखर, प्रथिभाशाली  व् गुणवान भावी पीढी का निर्माण किया जा सके | कार्यक्रम में भारी संख्या में  महिला व पुरुष डाक्टर, वैज्ञानिक व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे जिनमे मुख्य रूप से डा० किरण पाण्डेय, डा० कल्पना दीक्षित , डा ० मनीषा गद्रे, डा उमेश पालीवाल, डा० निशा रानी, जेनिफिट रो ( लन्दन ), आदि उपस्थित रहे | देव संस्कृत विश्वविद्यालय , हरिद्वार की अनुराधा व रजनी  बहिनों ने गर्भावस्था के दौरान किये जाने वाले महत्वपूर्ण आसन व् प्राणायाम , की जानकारी दी व् अभ्यास प्रस्तुत किया | डा० संगीता सारस्वत व डा० अमर नाथ सारस्वत ने कार्यक्रम के सफलतापूर्वक आयोजन में विशेष भूमिका निभाई | 


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