अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में "वृक्ष गंगा अभियान" के अतंर्गत धरती माँ को हरियाली की चादर ओढा़ने का अभियान संपूर्ण विश्व में व्यापक रूप से संचालित है जिसके अतंर्गत एक करोड़ वृक्षों के रोपण का संकल्प गायत्री परिवार द्वारा लिया गया है। अभियान के तहत बंजर भूमि या पहाड़ी को गोद लेकर उसे हरा भरा करने का कार्य देश भर में तीव्र गति से चल रहा है जिसके अतंर्गत अभी तक तरूपुत्र रोपण महायज्ञ द्वारा 23 पहाड़ियों को हरा भरा किया जा चुका है। गत वर्ष ग्राम फोपनार जिला बुरहानपुर मध्यप्रदेश की तर्ज पर ग्राम डाभी जिला-खंडवा मध्य प्रदेश में भी 1124 तरूपुत्र रोपण महायज्ञ का आयोजन गायत्री परिवार खंडवा जिले के युवाओं द्वारा संपन्न कर ग्राम डाभी को हरा भरा बनाया गया। ज्ञात हो कि यह कार्य जन सहयोग से किया गया। इस महायज्ञ में 1124 जोडों का पंजीयन कर 1124 परिवारों को पर्यावरण आन्दोलन से जोडा़ गया। दिनांक 8/7/12 को प्रातः 10 बजे संपन्न हुए तरूपुत्र रोपण महायज्ञ में 1124 परिवारों ने एक एक पौधे को पुत्र रूप में गोद लेकर उनका रोपण किया। पर्यावरण महायज्ञ के लिए 1124 गड्ढों के पास यज्ञ वेदी का निमार्ण किया गया था जिसमें वैदिक मंत्रो के साथ समस्त देव शक्तियों का आह्वान कर अग्निहोत्र का क्रम संपन्न हुआ जिसमें पर्यावरण के शोधन, राष्ट्र समृद्धि आदि की आहुति तरूरोपणकर्त्ताओ ने डाली। यज्ञ के पश्चात् सभी याजकों ने रोपित किए जाने वाले पौधे को गले लगाकर विधिविधान पूर्वक उसका रोपण किया। यज्ञ के प्रसाद के रूप में तरूप्रसाद के रूप एक एक पौधे का वितरण किया गया। इस स्थान का नाम "श्रीराम स्मृति उपवन" संत सिंगाजी पर्वत रखा गया है। कार्यक्रम में शांतिकुंज के प्रतिनिधी श्री केदार प्रसाद दुबे तथा श्री सुधीर भारद्वाज विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ निमाडी गीत "पर्यावरण को पर्व आयो रे चलो धरती का स्वर्ग बनाइला रे........." गीत से हुआ यज्ञ के पूर्व पर्यावरण प्रेमियों को संबोधित करते हुए शांन्तिकुंज प्रतिनीति श्री केदार प्रसाद दुबे ने कहा कि वृक्ष साक्षात् विषपायी शिव हैं जो कार्बन डाईआक्साइड को पीकर प्राणवायु आक्सीजन प्रदान करते है जीवन पर्यन्त करोडों की संपदा प्रकृति में लुटा कर अपने देवता होने का प्रमाण देते है। दुबे जी ने कहा कि - मां गंगा का अवतरण साठ हजार सगर पुत्रों का उद्धार करने के लिए भागीरथ के प्रयास से संभव हुआ था किन्तु इन तरूपुत्रों का योगदान उस भागीरथ से भी बढ़कर होगा क्योंकि ये लोग जो प्रयास कर रहे है उससे विश्ववसुधा को बचाया जा सकता है और 600 करोड़ लोगों के उद्धार का केवल यही एकमात्र विकल्प है। शांतिकुंज के उद्यान विभाग प्रमुख एवं पर्यावरणविद श्री सुधीर भारद्वाज ने पर्यावरण के क्षेत्र में पहाडियों को हरा भरा बनाने में गायत्री परिवार द्वारा किए गए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्य मध्यप्रदेश के बुरहानपुर, खंडवा, सनावद, शाजापुर, बडवानी, खरगोन आदि जिलों के साथ गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड आदि प्रान्तों में भी संपन्न होने जा रहे हैं। साथ ही कनाडा, यु॰एस॰ए॰, आदि देशों में भी वृक्ष गंगा अभियान में हो रहे कार्य को उन्होने बताया। वहीं नदियों को बचाने के लिए नदी के तटीय क्षेत्र में वृक्षारोपण कर हरित चूनर ओढा़ने के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि गायत्री परिवार द्वारा देश की 24 प्रमुख नदियों को बचाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इस अवसर पर गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ के प्रान्तीय संयोजक श्री आनंद विजय ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व की जनसंख्या में भारत आज सबसे बड़ा युवाओं का देश है जहाँ देश की आबादी का 65 फीसदी युवा है यदि इस महाशक्ति का नियोजन रचनात्मक गतिविधियों में किया जा सके तो भारत पुनः अपने प्राचीन गौरव को प्राप्त कर सकता है। ग्राम डाभी के गायत्री परिवार युवा कार्यकर्त्ता दिलीप राठौड गाँव के 50 युवा साथियों के साथ संकल्प लिया कि एक वर्ष में ग्राम डाभी को स्वच्छ, स्वस्थ, हराभरा, संस्कारी, स्वावलंबी, व्यसन मुक्त, गौवंश कृषि आधारित अर्थात् आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जावेगा जिसका 30 प्रतिशत कार्य वर्तमान में संपन्न किया जा चुका है। शांतिकुंज से आए श्री के पी दुबे जी ने वृक्ष गीता "ओ तरू पर उपकारी, मनमुद मंगलकारी। विषपायी शिव पालक-पोषक, सबविधि मंगलकारी।। ओ तरू परउपकारी...." का गायन किया। तरूपुत्र रोपण महायज्ञ का संचालन गायत्री परिवार के मेवालाल जी पाटीदार की टोली ने किया। श्री पाटीदार ने बताया कि ब्रम्हा-पाकड़, विष्णु-पीपल, तथा शिव-बरगद का वास होता है इसलिए हमारे पूर्वज समस्त पेड़ों तथा उन सभी को जिनका हम उपकार अनुदान प्राप्त करते है को पूजा करते थे। कार्यक्रम के कारण आसपास के लोगों में उत्साह देखते ही बन रहा था पांचजन्य के साथ पर्यावरणविद् सुधीर भारद्वाज की विशेष बातचीत - तरुरोपण महायज्ञ कहाँ-कहाँ हो रहे हैं? अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख आदरणीय डा. प्रणव पण्ड्या जी के मार्गदर्शन में हमनें अब तक 40 लाख से अधिक तरुरोपण कर चुके हैं। 1 करोड़ के लक्ष्य के साथ अब यह आयोजन विश्व स्तरीय हो चुका है। पर्यावरण संरक्षण हेतु जागरुकता कैसे लाते हैं? हमने इसका नाम ही तरुमित्र और तरुपुत्र रोपण यज्ञ दिया है तरु को मित्र या पुत्र कहने पर आपका भाव उसके साथ जुड़ जाता है। पुत्र का पोषण और मित्र का संरक्षण सहयोग हमारी परम्परा रही है। इसलिये लोग इस अभियान से जुडते हैं जागरुकता आती है।


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