Published on 2018-12-03 JAIPUR
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परम पूज्य गुरूदेव ने व्यक्ति निर्माण का मुख्य आधार स्वस्थ शरीर एवं स्वस्थ मन बताया है । सात आंदोलनों मे स्वास्थ्य एक मुख्य आंदोलन है । परम पूज्य गुरुदेव द्वारा रचित वांग्मय "जीवेम शरद :शतम " मे न केवल आरोग्य के सूत्र बताऐ गये हैं वरन जीर्ण रोगो से मुक्ति के उपाय भी बताऐ हैं । उनमे से एक है यज्ञोपैथी । चेतना केंद्र दुर्गापुरा जयपुर के कार्य कर्ताओं ने यह संकल्प लिया है कि गुरुदेव के इन सूत्रो को आचरण मे लाकर विज्ञान की labs मेँ परख कर इसके अनुसंधान के निष्कर्ष शांति कुंज भेजे जाऐ जिससे परम श्रद्गेय डाक्टर साहब के उस सपने को साकार करने मे मदद मिले कि आने वाले तीन सालो के अन्दर लोग अस्पताल न जा कर यज्ञोपैथी सेंटरस पर पहुचने लगे ।
23 नवम्बर को श्रधेय का आशीर्वाद लेकर ममता दीदी के नेत्रत्व मे काम कर रही यज्ञोपैथी टीम से मार्ग दर्शन लेकर आज से अनुसंधान कार्य शुरू कर दिया गया है । यज्ञ के लिये निर्धारित माप दंड के अनुसार cabin बनवा दिए गये हैं । patients के रेजिस्ट्रेशन कर लिये गये हैं । वनौषधि मंगवाकर मधुमेह के patients के एक ग्रूप पर रिसर्च कार्य शुरू कर दिया गया है । यह group 30 दिन तक सेंटर पर वनौषधि यज्ञ करेगा एवं उसके पश्चात प्राणायाम के द्वारा औषधि को ग्रहण करेगा ।

यह ग्रूप गुरुदेव के वांग्मय "जीवेम शरद: शतम "के आहार संयम एवं पंच तत्वों से रोगो के निदान के सूत्रो को जीवन मे अपनाएगा । 30दिन मे 24000 मंत्र का अनुष्ठान करेगा । इसकी पूर्णाहुति पर पुनः टेस्ट होंगे एवं उसके निष्कर्ष यज्ञोपैथी टीम एवं शांति कुंज को भेजे जाँएंगे ।
परम पूज्य गुरुदेव आशीर्वाद प्रदान करे


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