Published on 2018-12-11 HARDWAR

11 सूत्रीय कार्यों पर दोनों संस्थान मिलकर करेंगे सेमीनार व शोध कार्य
 हरिद्वार 10 दिसम्बर।

हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय प्रगति के नये-नये आयाम के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत के अलावा दुनिया के अठ्ठारह देशों के पचास से अधिक शैक्षणिक संस्थानों के साथ एमओयू से यह कार्य और अधिक सुगम हो पाया है और यह क्रम अब तक जारी है। विगत दिनों अपने लखनऊ प्रवास के दौरान देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने साथ ग्यारह सूत्रीय कार्यों को गति देने के लिए मिलकर कार्य करने पर समझौता किया।

                देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने बताया कि अपनी अल्प आयु में देसंविवि ने कई उपलब्धियाँ हासिल की है। देश दुनिया के पचास से अधिक शैक्षणिक संस्थानों के साथ एमओयू कर योग, चिकित्सा, संस्कृति आदि के साथ रिचर्स, सेमिनार आदि आयोजित करेगा और संबंधित संस्थानों में प्रतिभाग भी करेगा। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को नई-नई विधा सीखने एवं शोध कार्य में सहयोग मिल सकेगा। विवि के विद्यार्थी भारत व विदेशों में भी अपने रिसर्च पेपर पढ़ेंगे और वहाँ के नई विधा से अवगत हो अपनी कौशल विकास कर पायेंगे। केजीएमयू के साथ हुए 11 सूत्रीय कार्य योजना से दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को बहुत लाभ मिलेगा। मुझे आशा है जन सरोकारों के संबंध में होने वाले इन शोधों से समाज में नई क्रांति आयेगी।

                इस समझौते में हर्बल गार्डन के डेवलपमेंट, एक्सटर्नल रिसर्च प्रोजेक्ट, पीएचडी रिसर्च प्रोजेक्ट,पोस्ट डाक्टरोल रिसर्च प्रोजेक्ट सहित 11 विभिन्न विषयों पर आदान-प्रदान किया जायेगा।

                वहीं केजीएमयू में आयोजित नेशनल मेडीकोज आर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ.चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि प्रकृति, वातावरण व पर्यावरण को संतुलित रखने में यज्ञ की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। यज्ञ में प्रयोग होने वाली समिधा (लकड़ी), घी आदि से पर्यावरण व वातावरण शुद्ध होता है। यज्ञ से तनाव दूर होता है और यज्ञ से निकलने वाली भस्म पर्यावरण के लिए बहुत अच्छी होती है। उन्होंने कहा कि देसंविवि कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के मार्गदर्शन में देसंविवि यज्ञौपैथी पर बड़े पैमाने पर शोध कार्य हो रहे हैं।


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