Published on 2018-12-16 HARDWAR

हरिद्वार, 16 दिसम्बर। हमारे प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों का निवास जंगलों में, कंदराओं में नदियों के तट पर हुआ करता था जहाँ रहकर वे स्वयं तपस्या किया करते थे एवं आस पास के निवासियों को भी ज्ञान प्रदान करते थे। इस क्रम में वे प्रकृति के साथ रहकर प्रकृति का रक्षण भी करते थे। मानव जैसे जैसे विकास की ओर बढ़ता गया वैसे वैसे प्रकृति एवं संस्कृति से दूर होकर विकृति की ओर जा रहा है इसीके परिणामस्वरूप समाज में अनेक विषमतायें दिखाई पड रही हैं।                अखिल विश्व गायत्री परिवार ने इसी परंपरा के जागरण एवं देश की आत्मा गौ ग्राम के उत्थान हेतु श्रीराम आरण्यक का विचार प्रस्तुत किया है। गायत्री परिवार के संस्थापक पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने कहा है कि भारत को जगाना है तो गाँवों को तीर्थ के रूप में विकसित करना होगा।                गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ प्रणव पण्डया जी ने बताया कि हरिद्वार स्थित वैश्विक मुख्यालय से श्रीराम आरण्यक निर्माण की एक विधिवत योजना बनाई गई है जिसमें आठ विविध प्रकल्प जोड़े गये हैं, जिनके माध्यम से साधना, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन जैसे ग्राम प्रबंधन एवं व्यक्ति निर्माण के आधारभूत कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऋषि सूत्रों पर आधारित इस योजना में गायत्री परिवार देश के विभिन्न प्रान्तों में इसके लिये कार्यकर्ताओं को प्रेरणा देकर यह कार्यक्रम चला रहा है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा आदि प्रान्तों में चल रहे इस अभियान के अन्तर्गत वर्तमान में गुजरात के अरवल्ली जिले के मोडासा के पास इस प्रकल्प के लिये भूमि प्राप्त हुई है जिसमें श्रीराम आरण्यक के निर्माण का कार्य आरंभ होना है।                शान्तिकुन्ज के युवा प्रकोष्ठ प्रभारी श्री केदार प्रसाद दुबे ने इस विषय में जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के माध्यम से युवाओं, महिलाओं को स्वावलंबन के द्वारा रोजगार देने, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों को अपना कर स्वास्थ्य लाभ एवं गौ पालन के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ गौमाता के संरक्षण हेतु प्रशिक्षण दिया जाता है। भोपाल के पास चल रहे इस प्रकल्प में वनवासी बच्चों को छात्रावास में रखकर उन्हें विविध कौशल कार्यों में प्रशिक्षित किया जा रहा है एवं अनेक गौ उत्पाद निर्मित किये जा रहे हैं। गायत्री परिवार के इस अभियान से गाँवों का समग्र विकास हो सकना संभव है जिससे देश का भी विकास अवश्य होगा ऐसा विश्वास है।


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