Published on 2018-12-19 HARDWAR
हरिद्वार 19 दिसम्बर।




शांतिकुंज की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी का 65वाँ जन्मदिन सादगी के साथ मनाया गया। उनका जन्म 1953 में गीता जयंती के दिन हुआ था। दीपयज्ञ के साथ जन्मदिवसोत्सव का वैदिक कर्मकाण्ड पूरा किया गया। तत्पश्चात वे १९२६ से सतत प्रज्वलित अखण्ड दीपक का दर्शन कर पावन गुरसत्ता के चरण पादुकाओं से आशीष लिया। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या, व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्र सहित शांतिकुंज के कार्यकर्ता भाई-बहिनों एवं गायत्री विद्यापीठ के बच्चों ने गुलदस्ता भेंटकर स्वस्थ जीवन की मंगलकामना की।

                गीता जयंती, सन् क्-भ्फ् को जन्मे शैल दीदी का प्रारंभिक जीवन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में बीता। देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय इंदौर से साइकोलॉजी में पीजी एवं शोध करने के बाद अपना जीवन समाजोत्थान हेतु समर्पित कर दिया। अपनी बाल्यावस्था में स्काउट गाइड के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए अनेक पुरस्कार प्राप्त की। इस दौरान अपने शिक्षकों के प्रिय छात्राओं में से एक रहीं। शैलदीदी अपनी पढ़ाई से इतर अपने पिता गायत्री परिवार के संस्थापक व महान् स्वतंत्रता संग्राम सेनानी युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के कार्यों में भी बढ़ चढ़कर भागीदारी करती रही। समाज व राष्ट्र के हित में सदैव कार्य करने वाली शैलदीदी कालेज के पढ़ाई के दौरान ही अपना जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया था।

                उन्होंने परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं परम वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के चरण चिह्नों पर चलकर उनके द्वारा चलाये गए विभिन्न अभियान, नारी जागरण, बाल संस्कार, युवाओं को दिशा देने व पीड़ित मानवता की सेवा करने जैसे सेवापरक कार्यों में अपने आपको पूर्णतः समर्पित कर दिया। साथ ही पतितों के उद्धार के साथ भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में भी पूर्ण रूप से संलग्न रहीं। जिस तरह गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी स्नेह, करुणा, उदारता, समता और ममता की प्रतिमूर्ति थीं, उसी तरह शैलदीदी अपने आपको उदार हृदय रख हमेशा समाज सेवा में तत्पर रहती हैं। उनकी ही प्रेरणा तथा गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के मार्गदर्शन से शांतिकुंज में आपदा प्रबन्धन दल की टीम सदैव सेवा सहयोग के लिए तैयार रहती है ताकि कहीं आपदा आए तो यथाशीघ्र पहुँचकर पीड़ित मानवता की सहायता की जा सके। निश्चय ही नारी जाति ही नहीं, सम्पूर्ण समाज के लिए शैल दीदी एक आदर्श स्वरूप हैं।


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