Published on 2019-01-05 HARDWAR
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भारतीय संस्कृति के वाहक बनें युवा ः डॉ सहस्रबुद्धे

सद्गुणों की खेती करना सिखाती है संस्कृति ः श्रद्धेय डॉ, प्रणव पण्डया


देसंविवि के 34वें ज्ञानदीक्षा में देश के बारह राज्यों व नेपाल के विद्यार्थी हुए शामिल

हरिद्वार 5 जनवरी।



इंडियन काउंसिल फार कल्चरल रिलेशंस (आईसीसीआर) के अध्यक्ष डॉ विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि युवा भारतीय संस्कृति के वाहक बने। इस निमित्त देवसंस्कृति विश्वविद्यालय एक ऐतिहासिक प्रयोग कर रहा है। आप सभी इसके अंग बने है, यह सौभाग्य जागने के समान है। देसंविवि विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ एक नई दृष्टि देता है, यह दृष्टि विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान करने में सक्षम है।
       वे देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के 34वें ज्ञानदीक्षा समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह एक तपोभूमि है। यहाँ के वातावरण व माहौल में रहने का एक विशेष आनंद है। गायत्री परिवार के संस्थापक पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी एवं कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या जी के दूरदर्शितापूर्ण दृष्टिकोण का ही परिणाम है कि युवा उच्च शिक्षा के साथ जीवन जीने की विद्या भी प्राप्त करते हैं, जीवन में उदात्तता एवं सात्विकता को अपनाते हैं। राज्यसभा सांसद डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी में आत्मबोध, प्रयोजन एवं संबंधों का संकट दिखाई पड़ता है। उन्होंने अजातशत्रु पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी आदि कवियों की कविताओं का उल्लेख करते युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
       समारोह की अध्यक्षता करते हुए देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कृति है संस्कृति। संस्कृति ही मानव को महामानव बनने की दिशा में प्रेरित करती है। संस्कृति अंतर्जगत में सद्गुणों की खेती करना सिखाती है। दुर्गुणों को निकालकर सद्गुणों की स्थापना करना सिखाती है और इन्हीं उद्देश्यों के लिए युगऋषि पूज्य गुरुदेव पं.श्रीराम शर्मा आचार्य जी की प्रेरणा से सन् 2002 से देव संस्कृति विश्वविद्यालय संचालित है। कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने कहा कि आत्मबोध व तत्वबोध की नियमित साधना करने वाले व्यक्ति सदैव सफलता की सीढ़ी चढ़ता है। इस दौरान कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने विद्यार्थियों का आत्मबल व आत्म विश्वास जगाने के सूत्र दिये। कुलपति श्री शरद पारधी ने कहा कि गुण, कर्म व स्वभाव में परिवर्तन करने वाले ज्ञान को आप सब धारण करेंगे, तो निश्चय ही आप सफल होंगे।
       इससे पूर्व प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने ज्ञान दीक्षा समारोह की पृष्ठभूमि से अवगत कराया। कुलाधिपति ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों एवं आचार्यों को मिलकर शिक्षण कार्य एवं व्यक्तित्व विकास के साथ आगे बढ़ने का दीक्षा संकल्प दिलाये। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ सहस्राबुद्धे एवं कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को देसंविवि का प्रतीक चिह्न प्रदान किया। इस अवसर पर कुलाधिपति ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह, एवं युगसाहित्य भेंटकर सम्मानित किया। समारोह के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि व कुलाधिपति ने ई-रेनासा, ज्ञानप्रभा, सेलीबेट्री लाईफ विथ योगा का विमोचन किया।
       कुलसचिव श्री संदीप कुमार ने बताया कि देसंविवि के 34वें ज्ञानदीक्षा समारोह में छः मासीय पाठ्यक्रम- योग विज्ञान, धर्म विज्ञान एवं समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा, उप्र, मप्र, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान,उत्तराखण्ड, दिल्ली व झारखण्ड सहित चीन, जर्मनी, रुस व नेपाल से आये नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को ज्ञानदीक्षा के सूत्र से दीक्षित किया गया। श्री उदय किशोर मिश्र ने ज्ञान दीक्षा का वैदिक कर्मकाण्ड तथा डॉ. गोपाल शर्मा ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर शांतिकुंंज व देसंविवि परिवार सहित विभिन्न राज्यों से आये गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


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