Published on 2019-02-10 HARDWAR

प्रकृति व परमेश्वर के मिलन का महापर्व वसंत ः डॉ. पण्ड्या

उल्लास व उमंग का पर्व वसंत ः शैलदीदी

आचार्यश्री के 94वें आध्यात्मिक जन्मदिवस पर देश को व्यसन मुक्त बनाने का लिया संकल्प

19 विवाह सहित विभिन्न संस्कार बड़ी संख्या में सम्पन्न, सजाई गयी थी आकर्षक रंगोली


हरिद्वार 10 फरवरी। अखिल विश्व गायत्री परिवार का अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र शांतिकुंज में वसन्त उत्सव का प्रमुख समारोह आज हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। धर्मध्वजा फहराने के साथ प्रारम्भ हुए वसंत पर्व आयोजन में गायत्री परिवार प्रमुख शैल जीजी एवं देवसंस्कृति विवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने विश्वभर से आये गायत्री साधकों को वासंती उल्लास की शुभकामनाएँ दीं। सरस्वती पूजन, गुरुपूजन एवं पर्व पूजन के साथ हजारों साधकों ने भावभरी पुष्पांजलि अर्पित कीं।

                वसंत उत्सव के प्रमुख कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि प्रकृति व परमेश्वर के मिलन का महापर्व है वसंत। इसी समय प्रकृति सजधज कर परमेश्वर से मिलती है। वसंत विवेक का जागरण का भी पर्व है। आज समाज में फैले अंधकार का प्रमुख कारण सद्बुद्धि की कमी है। उसे दूर करने के लिए गायत्री साधना आवश्यक है। डॉ. पण्ड्या ने श्रीअरविन्द, रामकृष्ण परमहंस आदि अवतारी सत्ताओं का हवाला देते हुए कहा कि साधना से ही ये सिद्ध हुए और समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य कर पाये। वहाँ से लेकर अब तक अनेक ऐसे उदाहरण है, जिसमें पूज्य गुरुदेव ने अपने साधनात्मक तप से समाज को नयी दिशाधारा दी है। डॉ. पण्ड्या ने पूज्य गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्म दिवस वसंत पंचमी पर आगामी वर्ष के कार्यक्रमों की जानकारी दी। इसके तहत गृहे-गृहे गायत्री उपासना एवं गृहे-गृहे यज्ञ, वृक्षारोपण को गति देने एवं नशा भारत छोड़ों कार्यक्रम को और अधिक गति देने की रूपरेखा समझाई। इन कार्यक्रमों से जहाँ एक ओर जन-जन में वैचारिक क्षमता बढ़ेगी और पर्यावरण का संरक्षण होगा, तो वहीं दूसरी ओर समाज नशा से मुक्त होगा। जिससे राष्ट्र का उत्थान संभव है। इसके साथ ही उन्होंने गायत्री परिवार के चरणबद्ध तरीके से प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि वसंत उल्लास, उमंग का महापर्व है। वसंत पर्व के दिन ही लिपि का प्रादुर्भाव हुआ और इसी से ज्ञान का विस्तार हुआ और जनमानस में विकास दर बढ़ा है। शैलदीदी ने साधकों को पूज्य आचार्यश्री की हिमालय यात्रा एवं आत्मबोध पर बहुत ही मार्मिक संस्मरण सुनाए। उन्होंने ऋषि परंपरा और पूज्य गुरुदेव की विभिन्न सिद्धियों पर बोलते हुए कहा कि ऋषियों की परंपराओं को पूज्य गुरुदेव ने शांतिकुंज में पुनर्जीवित किया है। चाहे वो विश्वामित्र हो या वशिष्ठ, याज्ञवल्क्य हो या भगीरथ, अनेक ऋषियों की परंपराओं को यहाँ जीवित किया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक सामूहिक साधना नहीं होगी, तब तक सिद्धियाँ प्राप्त नहीं हो सकती। आज जहाँ मानवता संवेदनहीन हो रही है, वहाँ समूह साधना ही मनुष्य में भाव संवेदनाएँ जगाने में सक्षम है।

विभिन्न संस्कार हुए -

वसंत पर्व की पावन वेला में गायत्री परिवार प्रमुखद्वय ने शताधिक लोगों को गुरुदीक्षा दी, तो वहीं देश के विभिन्न राज्यों से आयेसैकड़ों की संख्या में बटुकों ने यज्ञोपवीत संस्कार कराये। नई दिल्ली, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, उप्र व उत्तराखण्ड सहित विभिन्न प्रांतों से आये 19 युवा दम्पतियों का आदर्श विवाह संस्कार सम्पन्न हुआ। नामकरण, मुण्डन, विद्यारंभ सहित कई संस्कार बड़ी संख्या में सम्पन्न हुए। सायं ब्रह्मवादिनी बहिनों द्वारा संचालित दीपमहायज्ञ में पूज्य आचार्यश्री के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प लिये गये।

ध्वजारोहण व सांस्कृतिक कार्यक्रम -

वसंतोत्सव के अवसर पर डॉ. पण्ड्या व शैलदीदी ने धर्मध्वजा फहराकर पूजन किया। गायत्री विद्यापीठ व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना व समूह भावनृत्य प्रस्तुत किये।

आर्कषक रंगोलियों से सजा शांतिकुंज -

शांतिकुंज की अंतेवासी बहिनों ने गायत्री परिसर में वीणा, हंस सहित विभिन्न आकर्षक रंगोलियों से सजाई थी।


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