Published on 2019-02-09 HARDWAR

समाज के विकास हेतु धर्मतंत्र को प्रखर होना चाहिए ः डॉ चिन्मय

अंतर्विद्यालयीन कविता सम्मेलन में विद्यार्थियों में झलका राष्ट्र प्रेम

गायत्री के सिद्ध साधक आचार्यश्री के आध्यात्मिक जन्मोत्सव में देश भर से शांतिकुंज पहुँचे साधक

हरिद्वार 8 फरवरी।

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिवसीय वसंतोत्सव के दूसरे दिन देश के कोने-कोने से हजारों साधक पहुँचे। यहाँ अपने आराध्यदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्यजी के आध्यात्मिक जन्मदिवस ‘वसंत महापर्व’ के अवसर पर उनके बताये सूत्रों को क्रियान्वित करने हेतु संकल्पित होंगे। वहीं शनिवार को सत्संग के दौरान साधकों-श्रद्धालुओं ने समाज के विकास में धर्मतंत्र की भूमिका से लेकर विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।

                शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित सत्संग में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि आज धर्मतंत्र व राजतंत्र को और अधिक पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए। उन्हें सम्पूर्ण समाज के उत्कर्ष के लिए अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजतंत्र का कार्य समाज में संसाधन एवं बाह्य विकास के लिए होता है, जबकि धर्मतंत्र का कार्य व्यक्तित्व के विकास के लिए होना चाहिए और यह कार्य श्रेष्ठ गुरु के संरक्षण में ही हो सकता है। ऐसा सद्गुरु जो राग, द्वेष से परे हो और सम्पूर्ण मानव जाति को समान दृष्टि से देखता हो। उन्होंने कहा कि युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ऐसे ही सद्गुरु हैं। प्रतिकुलपति ने कहा कि धर्म केवल आजीविका कमाने व व्यवसाय करने के लिए नहीं होना चाहिए, वरन् जनजागरण व पीड़ा निवारण के उद्देश्य लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्मतंत्र में इतनी शक्ति होती है कि वह पूरे समाज की दिशा को बदल सके। उन्होंने कहा कि पूज्य सद्गुरु पं.श्रीराम शर्मा आचार्य जी के दिशा निर्देशन में करोड़ों गायत्री परिवार आध्यात्मिक अनुष्ठान में जुटे हैं। डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से सद्गुरु की शक्तियों का उल्लेख किया। प्रतिकुलपति ने वसंतोत्सव की पूर्व वेला में साधकों को परीक्षाओं के लिए तैयार रहने, साधना में निरंतरता लाने एवं सद्ज्ञान प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ साहित्यों को नियमित अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।

                वहीं दूसरी ओर अंतर्विद्यालयीन कविता सम्मेलन में हरिद्वार के गायत्री विद्यापीठ, डीएवी हरिद्वार, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज ज्वालापुर, डीपीएस रानीपुर मोड, जवाहर नवोदय विद्यालय सहित आठ विद्यालयों के विद्यार्थियों ने राष्ट्र भक्ति जगाती त्याग, पराक्रम, शौर्य की प्रेरणा भरती संतो, सुधारकों व वीर सैनिकों की रचनाएँ प्रस्तुत की। इनमें दीक्षा, तृप्ति यादव, तनु, निखिल, रुपाशी आदि की कविताओं को खूब सराहना मिली।

                अगले कार्यक्रम में वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी ने शांतिकुंज द्वारा संचालित हो रही विभिन्न गतिविधियों के साथ आगामी कार्ययोजनाओं पर प्रकाश डाला। मातृशक्ति श्रद्धांजलि कार्ययोजना, सृजनशील कार्यकर्त्ताओं की खोज, शांतिकुंज की पचासवीं सालगिरह-दृष्टि जैसे विषयों पर श्रीमती यशोदा शर्मा, देवसंस्कृति विवि के कुलपति श्री शरद पारधी, श्री शशिकांत सिंह ने प्रकाश डाला। इससे पूर्व देश के कोने-कोने से आये गायत्री साधकों ने सामूहिक जप, ध्यान, योग एवं हवन आदि में भाग लिया। शांतिकुंज मीडिया विभाग के अनुसार वसंतोत्सव का मुख्य कार्यक्रम रविवार को सम्पन्न होगा तथा सामूहिक गुरुदीक्षा के अलावा विभिन्न संस्कार भी निःशुल्क सम्पन्न कराये जायेंगे।


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