Published on 2019-03-10 HARDWAR
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हरिद्वार 10 मार्च।

शांतिकुंज में अतुल्य भारत बलसाड (गुजरात) ग्रुप का पाँच दिवसीय तीर्थ सेवन सत्र हुआ। इसमें तीर्थ सेवन व जीवन निर्माण जैसे अनेक विषयों पर विषय विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी।
                प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ता डॉ.ओ.पी. शर्मा ने कहा कि मानवीय जीवन को ऊँचा उठाने के लिए उपासना, साधना एवं आराधना को व्यावहारिक जीवन में अपनाना चाहिए। इसके बिना विकास कर पाना मुश्किल है। अपने कई दशकों के अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ना हो, तो तदनुसार संबंधित प्रयोजनों को पूरा करने के लिए सकारात्मक ढंग से काम करना होता है। बौद्धिक विकास के लिए अध्ययन करना चाहिए। इसी तरह आध्यात्मिक विकास के लिए जप, तप आवश्यक है। डॉ. शर्मा ने कहा कि तीर्थ सेवन के अभिनव प्रयोग से ऋषि-मुनि अपनी क्षमता का विकास किया करते थे। डॉ. गायत्री शर्मा ने संस्कारवान भावी पीढ़ी को गढ़ने के लिए पहले स्वयं को तैयार करने आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जैसा सांचा होगा, मूर्तियाँ वैसी ही बनेंगी।
                शिविर समन्वयक के अनुसार पाँच दिन चले इस सत्र में कुल २४ सत्र हुए। जिसमें विचारों की सृजनात्मक शक्ति, गुरु महिमा, मानव जीवन की गरिमा, अमृत-कल्पवृक्ष, सप्त आंदोलन, कर्मफल का सिद्धांत, धन्यों गृहस्थ आश्रमः, आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी, युग निर्माण योजना-समग्र दर्शन, जीवन विद्या का आलोक केन्द्र देव संस्कृति विश्वविद्यालय आदि विषयों पर विषय विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी। इसके अलावा प्रतिभागियों को योगासन, प्राणायाम, ध्यान आदि की व्यावहारिक जानकारी देते हुए अभ्यास कराया गया। जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिविर संयोजक उर्मिलभाई देसाई के बताया कि पूज्य आचार्यश्री कहा करते थे कि जीवन में सार्थक बदलाव चाहते हैं, तो तीर्थों का सेवन करना चाहिए। इसी उद्देश्य को चरितार्थ करते हुए सेगवी, बलसाड के प्रतिभागी गण तीर्थ नगरी पहुँचे हैं। उन्होंने बताया कि शिविर के बाद इन्होंने हरिद्वार दर्शन, गंगा आरती में भी भाग लिया। सभी ने शांतिकुंज में आयोजित शिविर से मिले जीवन विद्या के ज्ञान को पाकर व हरिद्वार में देव दर्शन कर अपने जीवन में सार्थक बदलाव महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिविर के अंतिम दिन पुलवामा में शहीद जवानों की आत्मा की शांति हेतु सामूहिक श्राद्ध संस्कार किया। जागृति बेन, कुसुमबेन पटेल, रीटाबेन लाड़, प्रर्मिलाबेन लाड़ आदि ने बताया कि यह हमारी पहली यात्रा है। यहाँ हमें जीवन जीने की एक नई विधा मिली।


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