Published on 2019-04-08 HARDWAR

आदर्शों को स्थापित करने धरती पर आते हैं भगवान :श्रद्धेय डॉ पण्ड्या

हरिद्वार 7 अप्रैल।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब धर्म एवं आदर्शों की स्थापना के लिए भगवान आते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम धरती पर मर्यादाओं को स्थापित करने आए। उन्होंने मनुष्य का जीवन, लक्ष्य, उद्देश्य आदि को जीवन में जी कर दिखाते हुए स्थापित किया।
                वे देसंविवि के मृत्युंजय सभागार में नवरात्रि साधना में जुटे युवाओं को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि देसंविवि के युवा अपनी पढ़ाई के अलावा नैतिक उत्थान के लिए सामूहिक साधना में भी बढ़-चढ़कर भागीदारी करते हैं। इस दौरान विद्यार्थी साधना के अनुशासन का पालन करते हुए आहार-विहार का भी पालन करते हैं। इस अवसर पर कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरित मानस में उल्लेखित भगवान के अवतार प्रक्र्रिया को विस्तारपूर्वक समझाया।
                उन्होंने कहा कि अवतार विशेष समय में धरती पर अवतरित होते हैं, जब भगवान आते हैं, तो संसार में निर्मल रस फैलाते है, सत्य एवं आदर्शों की रक्षा करने के लिए अपने सहयोगियों-सहचारों को भी साथ लाते हैं, जिससे सम्पूर्ण समाज में धर्म की स्थापना हो सके। उन्होंने कहा कि जब कोई जीव (मनुष्य) भगवान के कार्यों में सहयोगी बनता है, तब उसका जीवन सार्थक है और यहीं मानव का लक्ष्य भी है। कुलाधिपति ने कहा कि रामकथा मनुष्य जीवन, संघर्षों एवं आदर्शों की कथा है। तुलसीदास ने आधुनिक काल में फिर से राम का अवतरण किया। ऐसे समय में जब आक्रांतों द्वारा मंदिरों को तोड़ा जा रहा था, मर्यादा तार-तार हो रही थी, बहुपत्नी विवाह का प्रचलन था तब तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस के माध्यम से राम के आदर्श को मानवता के सामने रखा। काफी विरोध एवं संघर्षों के बीच तुलसीदास ने भगवान श्रीराम के आदर्शों का प्रचार किया। एक अवतार त्रेता में हुआ और एक अवतार तुलसीदास ने आधुनिक युग में कर के दिखाया। उन्होंने कहा कि भगवान के अवतार की कथा सुनने का लाभ तभी है जब हमारे अंदर आदर्शों का अवतरण हो, हमारे मन में बैठे रावण की लंका जले एवं हृदय में भगवान श्रीराम स्थपित हो। इस अवसर पर कुलपति श्री शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव श्री बलदाऊ देवांगन, शांतिकुंज के अंतेवासी कार्यकर्तागण, देश-विदेश से नवरात्रि साधना करने आये साधकगण सहित समस्त विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर्स एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।


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