Published on 2019-06-02

व शक्तिशाली बनाने का एक आध्यात्मिक प्रयोग है यज्ञ- डॉ पण्ड्यागायत्री यज्ञ कराने घर-घर पहुँची गायत्री परिवार की टीमदेशभर के इक्कीस राज्यों के दो लाख चालीस हजार घरों में एक साथ एक समय में हुआ हवन हरिद्वार 2 जून।सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री माता गायत्री की आराधना से वैचारिक क्षमता शक्ति बढ़ती है, जिसके माध्यम से व्यक्तित्व में निखार आता है। जो किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए आवश्यक है। इन्हीं उद्देश्यों के लिए हरिद्वार स्थित शांतिकुंज के निर्देशन में देश भर के इक्कीस राज्यों के दो लाख चालीस हजार नये घरों (अर्थात् जहाँ पहली बार गायत्री यज्ञ हुआ) में एक साथ-एक समय में गायत्री यज्ञ सम्पन्न हुआ। आशा है कि इससे एक सुन्दर वातावरण विनिर्मित होगा, जो परिवार को सुदृढ़ बनाने मे सहायक होगा। साथ ही सद्बुद्धि प्रदात्री माता गायत्री की उपासना करने के लिए प्रेरित होंगे।                अभियान की शुरुआत करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि यह अभियान राष्ट्र को समर्थ व शक्तिशाली बनाने हेतु एक आध्यात्मिक प्रयोग है। एक साथ-एक समय में किये गये देश भर के दो लाख चालीस हजार घरों में हुए इन यज्ञों के माध्यम से जो ऊर्जा उत्पन्न हुई, उससे एक सकारात्मक वातावरण विनिर्मित होगा। जन जन में आध्यात्मिकता, आस्तिकता, पारिवारिक भावना व सेवा भाव का जागरण होगा। कहा कि यज्ञ के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, वातावरण का परिशोधन, वैचारिक उत्कृष्टता, मानवोचित्त गुणों का विकास आदि संभव है। उन्होंने कहा कि यज्ञ के भस्म में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जिससे कई प्रकार की बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में यज्ञौपैथी से विभिन्न प्रकार की बीमारियों पर शोध कार्य चल रहा है। संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने यज्ञाचार्यों की टीम को गायत्री यज्ञ के विभिन्न लाभों पर विस्तृत जानकारी दी। व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्र ने कहा कि नियमित यज्ञ करने से शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक लाभ मिलता है।                गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ व उपासना अभियान के समन्वयक केदार प्रसाद दुबे ने कहा कि शांतिकुंज से प्रातः सात बजे से ही यज्ञाचार्यों की चार सौ टोलियाँ निकलीं। एक टोली में दो-तीन भाई या बहिन शामिल थे। शांतिकुंज कार्यकर्त्ताओं, देसंविवि के युवाओं, गायत्री विद्यापीठ के विद्यार्थी एवं विभिन्न प्रशिक्षण शिविरों में आये प्रशिक्षणार्थियों की ये टोलियाँ ऋषिकेश, रायवाला, हरिद्वार, ज्वालापुर के अनेक गाँवों, कालोनियों में यज्ञ पिता-गायत्री माता की उपासना के साथ हवन करवाईं। यज्ञ टीम अपने साथ गायत्री यज्ञ में उपयोग होने वाली समस्त सामग्री व तुलसी का पौधा लेकर गयी थी। तुलसी के पौधे को प्रसाद स्वरूप यज्ञ कराने वाले के घर प्रसाद स्वरूप दी गयी। उन्होंने बताया कि केन्द्र व राज्य सरकारों के कई मंत्रियों के घरों में भी हवन का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। सामाजिक संस्थानों से लेकर कई जेलों में भी गायत्री यज्ञ सम्पन्न हुआ। इन स्थानों में स्थानीय परिजनों ने यज्ञीय कर्मकाण्ड कराया। देश के इक्कीस राज्यों के दो लाख चालीस हजार से अधिक घरों में हवन कराये गये। इन यज्ञों में करीब पच्चीस लाख लोगों ने भागीदारी की।                इससे पूर्व शांतिकुंज की यज्ञाचार्यों की टीम को महिला मण्डल की प्रमुख श्रीमती यशोदा शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।


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