Published on 2019-06-12 HARDWAR

शांतिकुंज ने गायत्री जयंती-गंगा दशहरा कार्यक्रम के दूसरे दिन निकाली भव्य रैली
सांस्कृतिक कार्यक्रम में बुराइयों पर कुठाराघात कर सकारात्मक सोच बढ़ाने के लिए किया प्रेरित

हरिद्वार 11 जून।


गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित हो रहे गायत्री जयंती व गंगा दशहरा कार्यक्रम के दूसरे भव्य रैली निकाली गयी, जिसे शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं- श्री कालीचरण शर्मा, डॉ. ओपी शर्मा  ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली शांतिकुंज के गेट नं.3 से निकलकर हरिपुरकलां व उत्तरी हरिद्वार होते वापस युगऋषि पं.श्रीराम शर्मा आचार्य व माता भगवती देवी शर्मा की पावन समाधि स्थल पहुँची। जहाँ महिला मण्डल की बहिनों ने आरती उतारकर स्वागत किया। रैली में गंगा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण सहित हरिद्वार को हराभरा बनाने हेतु अपील की गयी।
    वहीं शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित सत्संग को संबोधित करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने गायत्री की महिमा पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि गायत्री महामंत्र के मनोयोगपूर्वक जप से लौकिक व पारलौकिक स्तर पर सफलताएँ प्राप्त होती हंै। सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी माता गायत्री की अर्भ्यथना से सद्विवेक का जागरण होता है, जो मनुष्य में देवत्व का उदय करने तथा मानव में महामानव की क्षमता विकसित होने के लिए आवश्यक है। डॉ पण्ड्या ने विभिन्न आर्षग्रंथों में उल्लेखित श्लोकों, चौपाइयों के माध्यम से गायत्री महामंत्र की महिमा पर जानकारी दी। प्रतिकुलपति ने कहा कि गायत्री महामंत्र की साधना से साधक में पात्रता विकसित होती है और उसे लौकिक व पारलौकिक स्तर के लाभ भी मिलने लगते हैं। विश्वामित्र आदि ऋषियों ने गायत्री मंत्र के जप से ही सफलताएँ प्राप्त की थीं। गायत्री मंत्र की साधना से साधक में इन्द्रिय संयम, विचार संयम, अर्थ संयम व समय संयम का पालन करने की क्षमता भी विकसित होता है। प्रतिकुलपति ने गायत्री मंत्र की वैज्ञानिक विवेचन करते हुए इसके नियमित जप करने के लिए के आवाहन किया। साथ ही शांतिकुंज रचनात्मक प्रकोष्ठ के समन्वयक श्री केदार प्रसाद दुबे ने लोकमाता पतित पावनी माँ गंगा के प्रति हमारे दायित्व को उकेरा।  वहीं शांतिकुंज मनीषी श्री वीरेश्वर उपाध्याय, डॉ. ओपी शर्मा, केन्द्रीय जोनल समन्वयक श्री कालीचरण शर्मा, देसंविवि के प्रतिकुलपति श्री शरद पारधी ने संबोधित करते हुए जन-जन में सकारात्मक सोच पैदा करने एवं समाज के प्रति हमारे कर्त्तव्यों पर विस्तृत जानकारी दी।

    इससे पूर्व शांतिकुंज व गायत्री विद्यापीठ के कलाकारों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। जिसमें गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने, समाज की बुराइयों को मिटाने एवं जन-जन में सकारात्मक विचार पैदा करने की मार्मिक प्रस्तुतियों  को जनसमुदाय से खुब सराहना मिली। शांतिकुंज मीडिया विभाग के अनुसार गायत्री जयंती-गंगा दशहरा का मुख्य कार्यक्रम १२ जून को होगा। साथ ही विभिन्न संस्कार वैदिक परंपरानुसार निःशुल्क सम्पन्न कराये जायेंगे।


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