Published on 2019-06-14 HARDWAR

आंतरिक जीवन को गायत्री व बाह्य जीवन को गंगा करती है निर्मल - डॉ पण्ड्या
गायत्री और गंगा भाव संवेदनाओं की देवियाँ - शैलदीदी
बड़ी संख्या में गुरुदीक्षा सहित विभिन्न संस्कार निःशुल्क सम्पन्न, कई पुस्तकों का हुआ विमोचन

हरिद्वार, 12 जून।अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि मनुष्य के आंतरिक जीवन को सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री माता गायत्री निर्मल बनाती है, तो वहीं पतित पावनी माँ गंगे बाह्य जीवन को पवित्र करती है। गायत्री राष्ट्र आराधना का महामंत्र है। तो गंगा न केवल भारतवासियों के लिए वरन् विश्व समुदाय के लिए भी जीवनदायिनी है। इनकी शरण में जो भी आता है, बिना किसी भेदभाव के अपनी गोद में स्वीकारती हैं।
                श्रद्धेय डॉ. पण्ड्या गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित तीन दिवसीय गायत्री जयंती महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गंगा दशहरा व गायत्री जयंती मनाने आये देश-विदेश के हजारों स्वयंसेवी कार्यकर्त्ता एवं निर्मल गंगा जन अभियान में जुटे सैकड़ों युवा मुख्य रूप से मौजूद रहे। उन्होंने गायत्री महामंत्र व पतित पावनी गंगा की महात्म्य पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गायत्री महामंत्र के मनोयोगपूर्वक जप से उसका तत्त्वदर्शन साधक में समाता है, जिससें साधक में वयम् राष्ट्रे जागृयाम का भाव पैदा होता है। गायत्री साधना से विभिन्न समस्याओंं का दीर्घकालीन समाधान भी मिलता है। गायत्री मंत्र के जप से वैचारिक शक्ति बढ़ती है। उन्होंने कहा कि गंगा और गायत्री दोनों ही देव संस्कृति के ज्ञान विज्ञान की पुण्यधाराएँ हैं। इन दोनों में भारतमाता की दिव्य चेतना समायी है। इनमें देव भूमि और दिव्य भूमि भारत के पुरातन ऋषियों के महातप का प्रखर परिचय सन्निहित है। तप की पुण्य परंपरा में भागीरथ सूर्यवंश की पीढ़ी में अवतरित हुए। गंगा के जलकणों और गायत्री के मंत्र अक्षरों में ज्ञान-विज्ञान के सभी तत्त्व समाए हैं। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख ने कहा कि इन दिनों वैचारिक क्रांति के साथ आध्यात्मिक क्रांति की जरूरत है, जिससे लोगों में गिरती विचारधारा में सकारात्मक बदलाव हो सके और वे परिवार, समाज व राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान लगा सके।
                संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि गायत्री और गंगा भाव संवेदनाओं की देवियाँ हंै। इनकी प्रेरणाओं को जीवन में उतारने से जीवन महान बनता है। पतित पावनी गंगा ने करोड़ों लोगों को नवजीवन दिया है और आज वे ही अपने पुत्रों को सदाशयता के लिए पुकार रही है, जो उन्हें निर्मल व अविरल बना सकें। श्रद्धेया शैलदीदी ने नवचेतना के अवतरण के लिए बार-बार अभ्यास, सत्कर्मों की याद दिलाते रहने एवं आस्था-भावना को जाग्रत रखने पर बल दिया। इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुखद्वय ने ‘मंत्र ध्वनि और उसकी वैज्ञानिकता’, ‘वैज्ञानिक अध्यात्मवाद एवं समग्र अध्ययन’ पुस्तक के अलावा हारिये न हिम्मत (आडियो बुक) का विमोचन किया।
                इससे पूर्व पर्व पूजन का वैदिक कर्मकाण्ड संस्कार प्रकोष्ठ के आचार्यों ने सम्पन्न कराया, तो वहीं ब्राह्ममुहूर्त में गायत्री परिवार प्रमुखद्वय ने पूज्य आचार्यश्री के प्रतिनिधि के रूप में सैकड़ों श्रद्धालुओं को गायत्री महामंत्र की दीक्षा दी। गायत्री परिवार ने अपने आराध्यदेव पं० श्रीराम शर्मा आचार्यजी की २९वीं पुण्यतिथि को संकल्प दिवस के रूप में मनाते हुए उनके बताये सूत्रों को स्वयं पालन करने एवं दूसरों को प्रेरित करने की शपथ ली। महिला मण्डल की बहिनें तथा भाइयों ने नामकरण, अन्नप्राशसन, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत, विवाह सहित विभिन्न संस्कार बड़ी संख्या में निःशुल्क सम्पन्न कराये। पर्व के अवसर पर लिये संकल्प को पूर्णता तक पहुँचाने के उद्देश्य से सायंकाल दीप महायज्ञ में आहुतियाँ समर्पित कीं। मुख्य कार्यक्रम का संचालन श्री केदार प्रसाद दुबे ने किया।


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