Published on 2019-06-23 HARDWAR
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विगत 15 साल का रिकार्ड टूटा, कूड़ा-कचरा पीठ में ढोकर नीचे लाये 
हरिद्वार 22 जून।

थल सेना के जवानों के साथ देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का एक दल ने करीब 22 हजार 5 सौ फीट की ऊंचाई पर स्थित माउण्ट केदार डोम में तिरंगा व देसंविवि का झंडा फहराया। इसके साथ ही गोमुख, तपोवन, कीर्ति ग्लेशियर, भोजवासा आदि स्थानों में सफाई अभियान चलाया। माइनस 28 से 32 डिग्री के तापमान के बीच यात्रा कर यह दल कल देर सायं शांतिकुंज लौट आया। मेजर विकास शुक्ला के नेतृत्व में 24 सदस्यीय यह दल 19 मई को रवाना हुआ था। सकुशल लौटने पर अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या, श्रद्धेया शैलदीदी आदि ने उनका स्वागत किया।
      इस अवसर पर श्रद्धेय डॉ. पण्ड्या ने कहा कि सेना के साथ मिलकर देसंविवि ने सफाई अभियान में भागीदारी कर एक नई मिसाल कायम की है। भारत की धरोहर हिमालय क्षेत्र के करीब 22 हजार 5 सौ फीट की ऊँचाई पर तिरंगा व देसंविवि की पताका फहराना सुखद आश्चर्य है। इसके साथ ही गोमुख, कीर्ति ग्लेशियर आदि स्थानों में सफाई अभियान चलाना साहस भरा कार्य है। दल ने शरीर को कंपा देने वाले मानइस 25 से 32 डिग्री तापमान में भी केदार डोम की यात्रा व अन्य आध्यात्मिक तीर्थ में सफाई कर प्रेरणा देने वाला काम किया है। श्रद्धेया शैलदीदी ने दल के सभी सदस्यों से कुशल क्षेम जाना तथा उनके साहस को सराहा। प्रमुखद्वय ने उपवस्त्र, युग साहित्य आदि भेंटकर दल के सदस्यों को सम्मानित किया।
      दलनायक मेजर विकास शुक्ला ने बताया कि सेना व देवसंस्कृति विवि का 24 सदस्यीय दल 19 मई को गायत्री परिवार प्रमुखद्वय से आशीष व मार्गदर्शन लेकर रवाना हुआ था। इसमें से 14 सदस्य माउण्ट केदार डोम तक पहुँचे। शेष जवान संपर्क बनाये रखने के लिए अलग-अलग कैंपों में थे। उन्होंने बताया कि पिछले कई दशकों से चला आ रहा मिथक कि माउण्ट केदार डोम तक पहुँचना असंभव है, किन्तु ऋषिवर आचार्य पं. श्रीराम शर्मा व ईश्वर की प्रेरणा व आशीष से हम लोगों ने माउण्ट केदार डोम की यात्रा 11 दिन में पूरी की। माउण्ट केदार डोम में तिरंगा, सेना व देसंविवि का ध्वज फहराया। यात्रा के दौरान आध्यात्मिक ऊर्जा केन्द्र गोमुख, कीर्ति ग्लेशियर, तपोवन, भोजवासा आदि स्थानों से पाँच बोरे से अधिक कूड़ा-कचरा एकत्रित किया गया, जिसे दल के सदस्यों ने अपनी पीठ पर ढोकर नीचे लाये। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की धरोहर के रूप में हिमालय है। यहाँ की पवित्रता व दिव्य वातावरण का लाभ केवल साधना कर लेना चाहिए। मेजर शुक्ला ने बताया कि सन् 2005 के बाद कोई दल माउण्ड केदार डोम में ध्वज फहराकर सकुशल लौटा है। इस दल में अहमदनगर (महाराष्ट्र), जोधपुर व सूरतगढ़ (राजस्थान) में तैनात सेना के जवान तथा देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के नरेन्द्र गिरि आदि युवा शामिल रहे।


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