Published on 2019-07-17 HARDWAR

सद्गुरु की कृपा से मानव जीवन का नवनिर्माण संभव - डॉ. चिन्मय
हरिद्वार 15 जुलाई।

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित तीन दिवसीय गुरुपूर्णिमा महोत्सव के दूसरे दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत जन जागरण रैली से हुई। रैली को व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्रा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली शांतिकुंज गेट नं. तीन से निकलकर हरिपुरकलॉ, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, सप्तसरोवर क्षेत्र होते हुए वापस गायत्री तीर्थ में युगऋषि सद्गुरु पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी की समाधि स्थल पहुँची। जहाँ महिला मण्डल की बहिनों ने आरती उतारकर कर स्वागत किया।
                मुख्य सत्संग में आयोजित सभा में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने ‘स्वयं भगवान हमारे गुरु..’ विषय पर संबोधित किया। प्रतिकुलपति ने कहा कि वर्तमान समय की भागदौड़ भरी जिन्दगी में हर आदमी कुछ-न-कुछ पाने की चाहत में है। अपनी भौतिक इच्छा को पूर्ण करने के लिए दिन रात खपा देता है। जबकि हमारी अंतरात्मा कुछ और ही ढूंढ रही होती है। इन्हीं खोज को पूरा करने में सद्गुरु शिष्य को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के नवनिर्माण सद्गुरु की कृपा से ही संभव है। सद्गुरु के प्रति शिष्यों की श्रद्धा, भावना व भक्ति उसे आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने प्राचीन गुरु-शिष्य परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विवेकानंद ने स्वामी रामकृष्ण परमहंस के मार्गदर्शन व आशीष से ही देश-विदेश में भारतीय संस्कृति का पताका फहराये। इसी तरह अखिल विश्व गायत्री परिवार सद्गुरु पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी कृपा व मार्गदर्शन से ही विश्वभर में भटकाव भरी जिंदगी में एक आशा की किरण लेकर कार्य कर रहा है। उनके ही बताये सूत्रों को अपनाते हुए युवापीढ़ी सकारात्मक, रचनात्मक व सुधारात्मक कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साधना, उपासना व आराधना के माध्यम से अपनी आंतरिक क्षमताओं को विकसित करना चाहिए।
                दोपहरकालीन सभा में शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ता डॉ. ओपी शर्मा ने पूज्य आचार्यश्री के बताये यज्ञ चिकित्सा का मानव जीवन के साथ पर्यावरण पर होने वाले लाभों पर विस्तृत जानकारी दी। व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्रा ने कहा कि सद्गुरु की कृपा से ही मानव जीवन का उत्थान संभव है। शक्ति सम्पन्न गुरु ही अपने शिष्यों को भवसागर के बंधन से मुक्ति प्रदान करता है। प्रज्ञा अभियान के संपादक श्री वीरेश्वर उपाध्याय ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम गुरु शिष्य के संबंध को उकेरते हुए कहा कि जिस किसी ने सच्चे मन से युगधर्म का पालन किया, सद्गुरु ने उनका निहाल किया है। महिला मण्डल प्रमुख श्रीमती यशोदा शर्मा, देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी आदि ने भी अपने-अपने विचार रखे।
                शांतिकुंज मीडिया विभाग के अनुसार महोत्सव का मुख्य कार्यक्रम 16 जुलाई को होगा। इस दिन गायत्री परिवार प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या व श्रद्धेया शैलदीदी युगऋषि पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के प्रतिनिधि रूप में गायत्री महामंत्र की दीक्षा एवं विशेष उद्बोधन देंगे। साथ ही विभिन्न संस्कार भी निःशुल्क सम्पन्न कराये जायेंगे।


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