Published on 2019-07-17 HARDWAR

शिष्य के अधूरेपन को पूरा करता है सद्गुरु - डॉ. पण्ड्यागुरुपूर्णिमा श्रद्धा के मूल्यांकन का महापर्व - शैलदीदी
हरिद्वार 16 जुलाई।


अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि सद्गुरु अपने शिष्य की पात्रता को विकसित करने के साथ उसके जीवन के अधूरेपन को दूर करने का कार्य करता है। सद्गुरु के ज्ञान का कोष सदैव भरा रहता है। वह ज्ञानवान, विवेकशील एवं भावनाओं से परिपूर्ण होता है।
       श्रद्धेय डॉ. पण्ड्या गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित गुरुपूर्णिमा महापर्व के मुख्य कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर देश-विदेश के कई हजार गायत्री साधक उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि यथार्थ ज्ञान को जानने का महापर्व गुरुपूर्णिमा है। सच्चे गुरु का वरण कर उनके बताये सूत्रों को जीवन में उतारने एवं उनके सूझाये मार्गों पर चलने से शिष्य महानता की ओर अग्रसर होता है। सद्गुरु मिलना सौभाग्य जागने जैसा है। अपने जीवन के पिछले कई दशकों के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने उपनिषद, गीता सहित विभिन्न आर्षग्रन्थों का उदाहरण देते हुए गुरु-शिष्य के संबंध को उकेरा। डॉ. पण्ड्या ने गुरु पूर्णिमा से अगले एक माह तक चलने वाले वृक्षारोपण में भी भागीदारी करने का आवाहन किया।

       संस्था की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी ने गुरु को भाव संवेदना की मूर्ति बताया और कहा कि गुरुपूर्णिमा आत्म मूल्यांकन का महापर्व है। उन्होंने कहा कि सद्गुरु शिष्य की श्रद्धा, प्रतिभा को उभारता है, जिससे शिष्य का स्तर जनसामान्य से ऊँचा उठता है। पूज्य गुरुदेव ने गायत्री परिवार के करोड़ों अनुयायियों को ऊँचा उठाया है। शैलदीदी ने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा पर विस्तृत जानकारी दी।
       इस अवसर पर देश-विदेश से आये हजारों शिष्यों ने पूज्य आचार्यश्री के युग निर्माण की संजीवनी विद्या, सद्साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुखद्वय ने हिन्दी, मराठी की किताबों तथा शांतिकुंज पंचांग-2020 का विमोचन किया। इससे पूर्व युगऋषि पूज्य गुरुदेव के प्रतिनिधि के रूप में डॉ पण्ड्या व शैलदीदी ने सैकड़ों लोगों को गुरुदीक्षा दी। वहीं गायत्री तीर्थ में नामकरण, विद्यारंभ, उपनयन, मुण्डन, विवाह आदि संस्कार बड़ी संख्या में निःशुल्क संपन्न कराये गये। मुख्य कार्यक्रम का मंच संचालन केदार प्रसाद दुबे ने किया। संगीत विभाग के युग गायकों द्वारा सुन्दर प्रस्तुतियाँ दी गयीं। सायं भव्य दीपमहायज्ञ हुआ।
 शांतिकुंज ने बाँटे दो हजार से अधिक पौधेशांतिकुंज में गुरु पर्व मनाने आये साधकों को विदाई के समय एक-एक पौधा तरु प्रसाद के रूप में दिये गये। साथ ही उन्हें रोपने व संरक्षण के लिए प्रेरित किया। वहीं सिद्ध अखण्ड दीप दर्शन, हवन आदि क्रम में लंबी लाइन दिखी, जहाँ पंक्ति में खड़े श्रद्धालुओं को गायत्री विद्यापीठ के नौनिहालों ने पानी पिलाते नजर आये।
 अनेक देशों के गायत्री साधक सामूहिक चान्द्रायण साधना में जुटेः डॉ पण्ड्याश्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि आयुर्वेद में शरीर के बाह्यांतर परिष्कार के लिए कल्प चिकित्सा किया जाता है, उसी तरह अध्यात्म के क्षेत्र में चेतनात्मक कायाकल्प की चिकित्सा के रूप में चान्द्रायण साधना किया जाता है। इसके अंतर्गत शांतिकुंज के निर्देशन में इस समय देश भर में सामूहिक साधना के माध्यम से राष्ट्रोत्थान के लिए आध्यात्मिक पुरुषार्थ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुपूर्णिमा से श्रावण पूर्णिमा तक सामूहिक रूप से चान्द्रायण व्रत का किया जा रहा है। कनाडा, अमेरिका, इंग्लैण्ड, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, केन्या, तंजानिया आदि देशो के अलावा भारत के मप्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली उप्र आदि राज्यों के दस हजार से अधिक युवाओं एवं गायत्री साधकों ने अपना पंजीयन करा चुके हैं और वे सब आज से चान्द्रायण व्रत प्रारंभ कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ. पण्ड्या ने सोशल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश के इन साधकों को व्रत के अनुशासन को समझाया व संकल्पित कराया।


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