Published on 2019-07-23 HARDWAR

जीवन खुशी देने के लिए होना चाहिए ः डॉ. निशंक
चेतनापरक विद्या की सदैव उपासना करनी चाहिए ः डॉ पण्ड्या

हरिद्वार 21 जुलाई।जीवन विद्या के आलोक केन्द्र देवसंस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज के 35वें ज्ञानदीक्षा समारोह में नवप्रवेशार्थी समाज और राष्ट्र सेवा की ओर अपना पहला कदम बढ़ाते हुए वैदिक सूत्रों में बंधे। देसंविवि में सर्टीफिकेट, डिप्लोमा, स्नातक व परास्नातक के 41 विभिन्न कोर्स के लिए भारत के 22 राज्यों के अलावा चीन के 26, तिब्बत के दो, लिथुआनिया, नेपाल, इंडोनेशिया, मिस्र के एक-एक विद्यार्थी नये सत्र में शामिल हैं। ज्ञान दीक्षा समारोह में विवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच 523 नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को दीक्षित किया।
                ज्ञानदीक्षा समारोह के मुख्य अतिथि केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि देसंविवि एक ऐसा विवि है जहाँ मानव को मानव बनाया जाता है। डॉ. निशंक ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति के लोग विश्व को व्यापार मानते हैं, जबकि हमारी भारतीय संस्कृति विश्व को परिवार मानती है। देवभूमि स्थित देसंविवि भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत युवा तैयार कर रहा है, जो आने वाले समय प्रकाशपुंज की तरह दुनिया को प्रकाशवान करेगा। उन्होंने कहा कि यूजीसी के माध्यम से देश भर के 509 विवि व चालीस हजार महाविद्यालयों में सत्रांरभ होने पर नवीन विद्यार्थियों के अभिनंदन व पुरानों के साथ समन्वय के लिए एक विशेष कार्यक्रम ‘ज्ञान दीक्षा समारोह’ की तैयारियाँ चल रही है। इससे सभी में सामजस्य बनेगा और मिल-जुलकर कार्य के लिए युवा प्रेरित होगा। उन्होंने कहा कि हमारा जीवन खुशी देने के लिए होना चाहिए।
                समारोह की अध्यक्षता करते हुए देसंविवि के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि ज्ञानदीक्षा संस्कार विद्यार्थियों को नवजीवन प्रदान करने वाला है। कुलाधिपति ने कहा कि सद्ज्ञान से आंतरिक चेतना का विकास होता है। शिक्षक व छात्र बीच ऐसा सामंजस्य होना चाहिए जिससे ज्ञान का आदान-प्रदान का क्रम सदैव बना रहे। इससे एक तरफ विद्यार्थियों में पात्रता का विकास होता है, तो वहीं दूसरी तरफ वे धर्म के अनुसार आचरण करने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने कहा कि चेतनापरक विद्या की सदैव उपासना करनी चाहिए, जिससे अच्छाइयों की ओर सतत आगे बढ़ने हेतु आंतरिक क्षमता का विकास हो सके। प्राचीन आर्षग्रंंथों का उल्लेख करते हुए शिक्षा व विद्या के समन्वय के साथ चलने के लिए प्रेरित किया। प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने ज्ञानदीक्षा की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि आज व्यक्ति की नहीं, व्यक्तित्व की जरूरत है। कुलपति श्री शरद पारधी ने स्वागत भाषण दिया।
                इससे पूर्व समारोह का शुभारंभ कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या एवं केन्द्रीय मंत्री डॉ. निशंक ने दीप प्रज्वलन कर किया। विवि के कुलगीत के बाद देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी ने अतिथियों का स्वागत किया। नवप्रवेशार्थी छात्र-छात्राओं को उदय किशोर मिश्र ने ज्ञानदीक्षा का वैदिक कर्मकाण्ड सम्पन्न कराया। कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने उन्हें ज्ञानदीक्षा के संकल्प दिलाया। कुलाधिपति व केन्द्रीय मंत्री ने चयनित छात्र-छात्राओं को विवि का बैज व उपवस्त्र भेंट किया। इस मौके पर विवि की रिसर्च जर्नल एवं संस्कृति संचार, ई न्यूज- रेनासा, संस्कृति संचार के नवीन संस्करण तथा वैदिक इंफामेट्रिक्स, श्रीराम चरित मानस में जीवन मूल्य व टूरिज्म रिसर्च का अतिथियों ने विमोचन किया। मंच संचालन गोपाल शर्मा ने किया।
                इस अवसर पर प्रो. अजय कपूर-प्रतिकुलपति स्विनबर्न युनिवर्सिटी (आस्ट्रेलिया), श्री आरपी जैसवार सीईओ- टाटा मेमोरियल हास्पिटल बनारस, विधायक श्री सुरेश राठौर, ओमप्रकाश जमदग्नि, व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्र, देसंविवि के कुलसचिव श्री बलदाऊ देवांगन जी, अनेक प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकार, शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, देसंविवि के आचार्यगण, शांतिकुंज परिवार के वरिष्ठ सदस्य तथा देश-विदेश से आये अध्ययनरत व नवप्रवेशी छात्र-छात्राएँ एवं उनके अभिभावकगण उपस्थित रहे।


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