Published on 2019-08-01

शान्तिकुञ्ज में गुरुपूर्णिमा पर्व पर तीन दिनों (१४ से १६ जुलाई २०१९) में अनेक श्रद्धा संवर्धक- उत्साहवर्धक कार्यक्रम हुए। मुख्य समारोह को श्रद्धेय डॉ. प्रणव पड्या जी एवं श्रद्धेया शैल जीजी ने संबोधित किया। इससे पूर्व भावभरे प्रज्ञागीतों से श्रद्धासिक्त वातावरण में उन्होंने गुरुरूप में जन्मी अवतारी चेतना परम पूज्य गुरुदेव- परम वंदनीया माताजी का पूजन किया, निम्न संदेश दिया।

एक ही मार्ग है- समर्पण, शरणागति
• श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जीहम सौभाग्यशाली हैं कि स्वयं भगवान हमारे गुरु हैं। गुरु में परमात्मा की खोज करने से गुरु के गुरुता का बोध होता है। शिष्य के प्राणों में गुरु का तप और उसके विचारों में गुरु का ज्ञान प्रवाहित होने लगता है। बुद्धि से बोध की यात्रा कराने वाले सद्गुरु ही होते हैं। गुरु के प्राणों के बल से हर कंटक पथ पर चलना संभव हो जाता है।
गुरुपूर्णिमा गुरु की महिमा और अपने शिष्यत्व को याद करने का दिन है। जिन्हें सद्गुरु की प्राप्ति हो जाती है, वे महानता की ओर अग्रसर होते जाते हैं, उनका जीवन धन्य हो जाता है। समर्पण- शरणागति ही सद्गुरु की प्राप्ति का मार्ग है।
इस मिशन को भावनाशीलों ने ही सींचा है
• श्रद्धेया शैल जीजीआज ज्ञान के पूजन का, सद्गुरु के प्रति श्रद्धा और अनुशासन के आरोपण का दिन है। मनुष्य के पास अनेक विभूतियाँ हैं। उनका उपयोग करना आ जाये तो जीवन निहाल हो जाता है। लौकिक ज्ञान तो कोई भी दे सकता है, लेकिन अपनी विभूतियों को पहचानने और उनका सदुपयोग करने की कला सद्गुरु ही सिखाते हैं।
इस मिशन को भावनाशीलों ने सींचा है। उन्होंने न दिन देखा, न रात। जैसे शबरी श्रद्धा के बेर लेकर भगवान श्रीराम के श्रीचरणों में पहुँच गई थी, वैसे ही इन भावनाशीलों ने बिना किसी चाह के जो कुछ था सब मिशन के लिए लगा दिया। बंदा बैरागी, आरुणी जैसी श्रद्धा ने ही मिशन को जीवंत बनाये रखा है।


Write Your Comments Here:


img

Webinor युग सृजेता युवा संगम

गायत्री परिवार ट्रस्ट, पचपेड़वा, बलरामपुर यू पी मे webinor का कार्यक्रम संजय कुमार ( ट्रस्टी) के आवास पर संपन्न कराया गया. लगभग 15 युवाओं तथा 10 वरिष्ठ परिजनों ने इस webinor मे भाग लिया......

img

अभी तो

अभी तो मथने को सारा समुंद्र बाकी है,अभी तो रचने को नया संसार बाकी है,।अभी प्रकृति ने जना कहां नया विश्व है ?अभी तो गढ़ने को नया इंसान बाकी है।।अभी तो विजय को सारा रण बाकी है,अभी तो करने.....

img

सभी बढें हैं

सभी बड़े हैं ,सभी चले हैं गुरुवर तेरी राहों में।तरह तरह के फूल खिले हैं ,गुरुवर तेरी छांव ।।तपती हुई रेत थी नीचे, ऊपर जेठी घाम थीदुनिया में तो चहु ओर से मिली तपिश है आग की ,आकर मिली हिमालय.....