Published on 2019-08-03
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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही संभव है देश का विकास डॉ. चिन्मय जी 
देश के स्वस्थ्य एवं समग्र विकास के लिए उच्चस्तरीय शिक्षा की आवश्यकता है। उत्कृष्ट पीढ़ी का निर्माण तभी संभव है जब शिक्षा का लक्ष्य उत्कृष्ट हो, योजनाएँ तदनुरूप हों और उन्हें विद्यार्थियों के आचरण में उतारने वाले शिक्षकों का व्यक्तित्व महान हो, अपने धर्म के प्रति समर्पण का भाव हो। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने यह संदेश देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए दिया। 
यह कार्यशाला देसंविवि में 28 से 30 जून की तारीखों में सम्पन्न हुई। एनआईटीटीटी के पूर्व प्रोफेसर प्रो. पीयूष वर्मा तथा देसंविवि के प्रतिकुलपति जी ने इसका उद्घाटन किया। तीन दिन चली इस कार्यशाला में प्रो. पीयूष वर्मा ने पाठ्यक्रम निर्माण, मूल्यांकन पद्धति, कोर्स की रूपरेखा, आदर्श शिक्षकों के गुण, शिक्षण में मीडिया एवं तकनीक का उपयोग जैसे अनेक विषयों पर बड़े उपयोगी और प्रभावशाली सूत्र दिये। इसके समानान्तर प्रयोगात्मक प्रशिक्षण भी चलता रहा। 
समापन सत्र में देसंविवि की 17 वर्ष की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रतिकुलपति जी ने कहा कि हम अपने विवि. तक ही सीमित न रहकर पूरे देश एवं समाज में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए हम प्रयत्नशील और प्रतिबद्ध हैं। इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन निरंतर होता रहेगा। 
डॉ. सुखनन्दन सिंह ने तीन दिन का सारांश और उपलब्धियों की जानकारी दी। डॉ. चिन्मय ने प्रतिभागी शिक्षकों को प्रमाण पत्र दिये एवं प्रो. पीयूष वर्मा का सम्मान किया। कार्यशाला के समन्वय एवं प्रबंधन में उपकुलसचिव डॉ. स्मिता वशिष्ठ, डॉ. उमाकान्त इंदौलिया, डॉ संतोष कुमार, डॉ. वंदना सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


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