Published on 2019-08-17

बुरहानपुर। मध्य प्रदेश

खुली जमीन या वनों में हरीतिमा संवर्धन में सबसे बड़ी समस्या रोपे गये पौधों को जानवरों से चरने से बचाने की है। इस समस्या का समाधान ‘माता की बाड़ी’ के माध्यम से किया जा रहा है। इसके अंतर्गत पौधों को घरों में या स्कूल आदि सार्वजनिक स्थानों की खुली जमीन में बड़े प्लास्टिक बैग में रोपकर उन्हें दो से तीन वर्षों में 10- 12 फीट तक विकसित किया जाता है। बाद में इन विकसित पौधों को वृक्षारोपण की वास्तविक जगह पर ले जाकर रोप दिया जाता है।

5000बुरहानपुर शाखा ने इस वर्ष इस प्रयोग से 5000 पौधे विकसित करने का लक्ष्य रखा है। गाँव- गाँव गोष्ठियाँ कर लोगों को माता की बाड़ी आरंभ करने और उनमें 11 से लेकर 51 तक पौधे विकसित करने का लक्ष्य दिया गया है। गायत्री परिवार इसके लिए आवश्यक पॉलीथीन बैग और बीज उपलब्ध करा रहा है।

2000श्रीराम गुरुकुल, खड़कौद के 50 बच्चों ने इस कार्य में विशेष योगदान देते हुए 2000 पौधे विकसित करने का बीड़ा उठाया है। वे जामुन, जाम, सीताफल, बरगद, पीपल, रक्तचंदन, गूलर, आम, सीता अशोक आदि अनेक प्रजातियों के पौधे विकसित कर रहे हैं।


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