Published on 2019-08-23
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देव संस्कृति विश्वविद्यालय का 35वाँ ज्ञानदीक्षा समारोह 21 जुलाई 2019 को कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भौतिक जगत की जानकारियाँ प्रदान करने वाली शिक्षा धन, व्यापार और रोजगार तो दिला सकती है, लेकिन इंसान को सुख- संतोष प्रदान नहीं कर सकती। सही मायनों में विद्या वही है जो अमृतत्व प्रदान करे, व्यक्ति के गुण, कर्म, स्वभाव का परिष्कार कर उसे मानवमात्र, जीवमात्र की भलाई के लिए जीना सिखाये।



ज्ञानदीक्षा कर्मकाण्ड के साथ श्रद्धेय डॉ. साहब ने विद्यार्थियों को विद्यार्जन के लिए आवश्यक उपनिषदों में वर्णित सूत्र, नियम, अनुशासनों के पालन तथा वर्जनाओं से बचने के संकल्प कराये। इस अवसर पर उन्होंने अपने विवि. के विद्यार्थियों को सारे देश और दुनिया के लिए आदर्श प्रस्तुत करने की प्रेरणा दी।


मंत्री महोदय एवं समस्त गणमान्यों को संबोधित करते हुए श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने कहा कि देश में जीवन मूल्यों को प्रोत्साहित करने वाली, जीवन में अध्यात्म का समावेश करने वाली शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। हम इस दिशा में मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं।


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