Published on 2019-09-19 AJMER
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पुष्कर, अजमेर। राजस्थान

विश्वप्रसिद्ध तीर्थ पुष्करराज की पौराणिक गरिमा को अभिनव प्रेरणाओं के साथ पुनर्जाग्रत् करने और तीर्थ को जीवंत बनाने के लिए अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा पुष्करतीर्थ की पाँच दिवसीय 24 कोसीय पदयात्रा और 84 कोसीय वाहन यात्रा की पुण्य परम्परा आरंभ की है। श्रावण कृष्ण एकादशी से हरियाली अमावस तक इस वर्ष 7वीं ‘पुष्कर अरण्य तीर्थ प्रदक्षिणा’ का बहुत ही सफल एवं प्रभावशाली आयोजन हुआ। स्थानीय संत- महंतो से लेकर शासन- प्रशासन, तीर्थयात्री एवं आम जनमानस पर अपना गहरा प्रभाव छोड़ने में यह यात्रा सफल रही।

पुष्कर अरण्य तीर्थयात्रा में पाँच दिन तक निरंतर प्रवास करते हुए मार्ग के गाँव- नगरों में जनजागरण करते चलने का विधान है। सामूहिक जप, ध्यान, यज्ञ, अर्ध्य, तर्पण, मार्जन, अभिषेक आदि उपासनात्मक क्रम के साथ तीर्थों की स्वच्छता के लिए श्रमदान, दीवार लेखन, वृक्षारोपण, जनसभाएँ भी की जाती हैं। सायंकालीन सत्संग- दीपयज्ञ में पौराणिक स्थलों की गरिमा का बोध कराया जाता है।
 28 जुलाई से 1 अगस्त 2019 तक की सप्तम यात्रा में 500 पदयात्रियों एवं 25 वाहनों में 200 परिजन- श्रद्धालुओं ने भाग लिया।  108 गाँवों के 743 देवस्थापनाएँ हुई।  47 विद्यालयों में श्री बहादुर सिंह गुर्जर द्वारा गोष्ठियाँ लेकर बच्चों के सामूहिक जन्मदिन मनाए गए, उन्हें नशे से दूर रहने की प्रेरणा दी गई।


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