Published on 2019-10-05

ऋषि, संत, शहीद, सुधारकों को भी दी गई श्रद्धाञ्जलि

शान्तिकुञ्ज एक दिव्य तीर्थ है जहाँ का जीवन- दर्शन प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं को अनुप्राणित करता है। इस संस्कारित दिव्यभूमि में दिवंगत आत्माएँ भी तृप्ति प्राप्त करती हैं। वैसे तो प्रतिदिन सैकड़ों लोग शान्तिकुञ्ज आकर अपने पितरों को पूरी श्रद्धा और विधि विधान के साथ श्रद्धाञ्जलि अर्पित करते हैं, लेकिन श्राद्ध पक्ष की महिमा ही कुछ और है। इस वर्ष इस दिव्य तीर्थ में 35,000 से अधिक लोगों ने अपने पितरों का तर्पण किया। विविध मंत्र एवं कर्मकाण्ड की भावभरी प्रेरणाओं के साथ उन्हें जलाञ्जलि- तिलाञ्जलि अर्पित की एवं पिण्डदान किया।

शान्तिकुञ्ज में श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन हजारों परिजनों ने तर्पण किया। देश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों से लोग अपने पितरों का तर्पण करने शान्तिकुञ्ज आये। कई- कई पारियाँ हुई । व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्रा जी एवं श्री उदयकिशोर मिश्रा के नेतृत्व में 10 से अधिक आचार्यों ने कर्मकाण्ड सम्पन्न कराया। मातृनवमी के दिन लगभग 2700 लोगों ने और सर्वपितृ अमावस्या के दिन 6000 से अधिक लोगों ने श्राद्ध- तर्पण किया। श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की याद में एक- एक पौधा रोपने का संकल्प लिया।

शान्तिकुञ्ज में अपने सम्बन्धी पितरों के तर्पण की परम्परा है ही, इसके साथ प्रत्येक व्यक्ति समाज के उत्कर्ष के लिए जीवन समर्पित करने वाले ज्ञात- अज्ञात ऋषि, संत, सुधारक, शहीदों की आत्मा की शान्ति, तृप्ति के लिए भी तर्पण कर उनके सामाजिक उपकारों से उऋण होने के नैतिक दायित्वों को निभाता है। उनके द्वारा विभिन्न आपदाओं तथा असमय कालकवलित होने वाले पितरों को भी श्रद्धाञ्जलि दी जाती है। इस प्रकार शान्तिकुञ्ज में अपनायी जाने वाली युगऋषि परम पूज्य गुरुदेव द्वारा प्रेरित श्राद्ध- तर्पण की परम्परा मानवमात्र के लिए कल्याणकारी है, हर दिवंगत आत्मा को तृप्ति प्रदान करती है।


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