Published on 2019-10-09 ALWAR

अलवर (राजस्थान) में आयोजित प्रबुद्ध जनसभा को संबोधित करते हुए शान्तिकुञ्ज प्रतिनिधि ने दिया संदेश

सभ्य समाज की स्थापना के लिए पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, सुन्दरता, सुव्यवस्था जैसे प्रयास पर्याप्त हो सकते हैं, लेकिन हमारी सनातन संस्कृति के अनुरूप सतयुगी समाज का निर्माण लोगों के अंत:करण की उत्कृष्टता पर ही निर्भर है। पश्चिमी देशों की सभ्यता सभी को भले ही लुभाती हो, लेकिन वहाँ की स्वच्छन्द, स्वार्थपरक एकाकी जीवनशैली से उत्पन्न तनाव डरावना होता है। आज सारा विश्व सुख- शांति की स्थापना के लिए भारत की ओर देख रहा है, तब हमें अपनी संस्कृति के महत्त्व को समझना चाहिए। परमपूज्य गुरुदेव का कथन है कि प्यार और सहकार से भरापूरा परिवार ही धरती का स्वर्ग होता है। यह प्यार और सहकार मानवीय उत्कृष्टता पर निर्भर है।
डॉ. चिन्मय पण्ड्या, प्रतिकुलपति देव संस्कृति विवि. ने अलवर के प्रताप ऑडिटोरियम में आयोजित प्रबुद्ध जनसभा को ‘मानवीय उत्कर्ष- एक चिंतन’ विषय से संबोधित करते हुए यह संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने मानव जीवन की गरिमा और उसकी सार्थकता पर जो संदेश दिया उससे हर श्रोता प्रभावित था। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार का व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण का आन्दोलन आंतरिक उत्कृष्टता की बुनियाद पर टिका है। गायत्री और यज्ञ को घर- घर पहुँचाने के साथ हमें समाज के हर वर्ग- हर व्यक्ति के जीवन में साधना, सेवा, सद्भावना का समावेश करना है।
यह कार्यक्रम 13 सितम्बर को आयोजित हुआ। पश्चिम जोन प्रभारी शान्तिकुञ्ज प्रतिनिधि श्री दिनेश पटेल, श्री रामावतार पाटीदार डॉ. चिन्मय जी के साथ थे। नगर परिषद के सभापति श्री अशोक खन्ना सहित कई शिक्षण संस्थाओं के प्राचार्य, प्रोफेसर, 20 से अधिक संस्थाओं के प्रमुख, न्यायाधीश श्री सतीश कौशिक, कई एडवोकेट एवं गणमान्य उपस्थित थे। 1000 बैठक वाला सभागार खचाखच भरा था। गलियारों में भी प्रबुद्धजन खड़े थे। कार्यकर्त्ताओं को तो बाहर कोरिडोर में ही रहना पड़ा।

आरंभ में वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्री सतीश कुमार सारस्वत ने गायत्री परिवार करौली कुण्ड अलवर का परिचय दिया। उन्होंने सन् 1958 से लेकर अब तक की शाखा की प्रगति यात्रा की जानकारी दी। शान्तिकुञ्ज प्रतिनिधि ने भी स्थानीय शाखा की रचनात्मक गतिविधियों और बुद्धिजीवियों को उत्कृष्टता की ओर ले जाने के प्रयासों की सराहना की।
यह कार्यक्रम बहुत सफल रहा। सभी डॉ. चिन्मय जी के विचारों के प्रति मंत्रमुग्ध थे। अनेक लोगों ने गायत्री परिवार की नियमित गतिविधियों में भाग लेने का उत्साह व्यक्त किया।



योग प्रदर्शन

देव संस्कृति विश्वविद्यालय से स्नातक एवं योग में पीएचडी डॉ. अशोक पाठक अलवर में अंतर्राष्ट्रीय योग संस्थान के माध्यम से नन्हे बालकों को योग की शिक्षा देते हैं। उनके द्वारा प्रशिक्षित बच्चों ने योग प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का मन जीत लिया। पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।


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