Published on 2019-10-17
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राउरकेला। ओडिशा

अपने बच्चों को संस्कारवान बनाने की ललक तो सभी को होती है। प्रसन्नता तब होती है जब गायत्री परिवार की प्रेरणा और प्रोत्साहन से शिक्षक भी इसके लिए उत्साहित हो रहे हैं। ऐसा ही उदाहरण है वीणापाणि विद्या मंदिर, राउरकेला में चल रही बाल संस्कार शाला। वहाँ की प्रधानाध्यापिका श्रीमती कुंतला पात्र ने स्वयं मिशन की नैष्ठिक कार्यकर्त्ता डॉ. मंजू महापात्रा से आग्रह कर यह बाल संस्कार शाला आरंभ कराई है।

डॉ. मंजू शर्मा महापात्र अपने आसपास के क्षेत्रों में बाल संस्कार शालाएँ चला रही हैं। कविता, कहानी, नाटक, गीत आदि के माध्यम से बच्चों को अच्छे संस्कार देने में बहुत सफल हैं। उनकी इस प्रतिभा का लाभ लेते हुए श्रीमती कुंतला पात्र ने भी अपने बच्चों को संस्कारवान बनाने का दायित्व डॉ. मंजू शर्मा महापात्र को दिया।


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अभी तो

अभी तो मथने को सारा समुंद्र बाकी है,अभी तो रचने को नया संसार बाकी है,।अभी प्रकृति ने जना कहां नया विश्व है ?अभी तो गढ़ने को नया इंसान बाकी है।।अभी तो विजय को सारा रण बाकी है,अभी तो करने.....

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सभी बढें हैं

सभी बड़े हैं ,सभी चले हैं गुरुवर तेरी राहों में।तरह तरह के फूल खिले हैं ,गुरुवर तेरी छांव ।।तपती हुई रेत थी नीचे, ऊपर जेठी घाम थीदुनिया में तो चहु ओर से मिली तपिश है आग की ,आकर मिली हिमालय.....

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स्वच्छता मनुष्यता का गौरव गन्दगी हटाने में उत्साह रहे.....