Published on 2019-10-22
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वर्ष 2019- 20 ‘गृहे- गृहे गायत्री यज्ञ- उपासना’ वर्ष है। हर क्षेत्र में बड़ी संख्या में घर- घर यज्ञ के सामूहिक प्रयोग हो रहे हैं। इस अभियान से उत्साहित जनमानस को आगे की दिशा देना तथा गृहे- गृहे यज्ञ अभियान को और भी लोकप्रिय बनाने के लिए वातावरण तैयार करना शान्तिकुंज की टोलियों द्वारा संचालित कार्यक्रमों का प्रमुख विषय होगा। ऐसे 400 से अधिक कार्यक्रम पूरे देश में आयोजित होने जा रही हैं।

शारदीय कार्यक्रमों की शृंखला नवरात्र से आरंभ हो गई। श्रद्धेया शैल जीजी एवं श्रद्धेय डॉ. साहब ने 1 अक्टूबर को टोली के सदस्यों का मंगल तिलक कर टोलियों को भावभरी विदाई दी। उन्होंने कहा कि यह देवत्व के जाग्रत् और संगठित होने का विशिष्ट अवसर है। सदैव की भाँति इस बार भी असुरता को निरस्त करने का आधार अध्यात्म ही होगा। आज छोटे- छोटे बच्चों तक में जो आध्यात्मिक स्फुरणा दिखाई देती है वह युगावतार की एक महान दैवी योजना का ही प्रभाव है।
प्रशिक्षण शिविर :: टोलियों की विदाई से पहले शान्तिकुञ्ज में टोलियों का सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित हुआ। वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं के प्रेरक उद्बोधनों के साथ हर विषय का प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दिया गया।


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अभी तो

अभी तो मथने को सारा समुंद्र बाकी है,अभी तो रचने को नया संसार बाकी है,।अभी प्रकृति ने जना कहां नया विश्व है ?अभी तो गढ़ने को नया इंसान बाकी है।।अभी तो विजय को सारा रण बाकी है,अभी तो करने.....

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सभी बढें हैं

सभी बड़े हैं ,सभी चले हैं गुरुवर तेरी राहों में।तरह तरह के फूल खिले हैं ,गुरुवर तेरी छांव ।।तपती हुई रेत थी नीचे, ऊपर जेठी घाम थीदुनिया में तो चहु ओर से मिली तपिश है आग की ,आकर मिली हिमालय.....

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स्वच्छता मनुष्यता का गौरव गन्दगी हटाने में उत्साह रहे.....