Published on 2019-11-09
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश

प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी गायत्री ज्ञान मन्दिर में पितृपक्ष में श्राद्ध- तर्पण करने वालों में भारी उत्साह था। व्यवस्थापक श्री उमानन्द शर्मा जी के अनुसार प्रतिदिन सामूहिक श्राद्धक्रम चला। इसमें न केवल पितरों की तृप्ति- शान्ति, सद्गति की प्रार्थना की गई, बल्कि लोगों को मरणोत्तर जीवन की सच्चाई बताते हुए अपने सत्कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने और अपने जीवन का श्रेष्ठतम उपयोग करते हुए उसे सार्थक बनाने की प्रेरणा दी गई।

कर्मकाण्ड के बाद श्रद्धालुओं को जीवन की यथार्थता और मरणोत्तर जीवन पर लिखी गई परम पूज्य गुरुदेव की कई पुस्तकें ज्ञान प्रसाद स्वरूप भेंट की गईँ। ये पुस्तकें हैं- मैं क्या हूँ? गहना कर्मणोगति:, मरने के बाद हमारा क्या होता है, पितरों को श्रद्धा दें वे शक्ति देंगे, पितर हमारे अदृश्य सहायक... आदि।


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Webinor युग सृजेता युवा संगम

गायत्री परिवार ट्रस्ट, पचपेड़वा, बलरामपुर यू पी मे webinor का कार्यक्रम संजय कुमार ( ट्रस्टी) के आवास पर संपन्न कराया गया. लगभग 15 युवाओं तथा 10 वरिष्ठ परिजनों ने इस webinor मे भाग लिया......

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अभी तो

अभी तो मथने को सारा समुंद्र बाकी है,अभी तो रचने को नया संसार बाकी है,।अभी प्रकृति ने जना कहां नया विश्व है ?अभी तो गढ़ने को नया इंसान बाकी है।।अभी तो विजय को सारा रण बाकी है,अभी तो करने.....

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सभी बढें हैं

सभी बड़े हैं ,सभी चले हैं गुरुवर तेरी राहों में।तरह तरह के फूल खिले हैं ,गुरुवर तेरी छांव ।।तपती हुई रेत थी नीचे, ऊपर जेठी घाम थीदुनिया में तो चहु ओर से मिली तपिश है आग की ,आकर मिली हिमालय.....