Published on 2019-11-11

'' कोरबा अश्वमेध यज्ञ,रजत जयंती महोत्सव एवं २५१ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ,प्रबुद्घ वर्ग संगोष्ठी, "मानवीय उत्कर्ष" इंदिरा ऑडिटोरियम, कोरबा|| * आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी , , १० नवम्बर २०१९, कोरबा छत्तीसगढ़


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अभी तो

अभी तो मथने को सारा समुंद्र बाकी है,अभी तो रचने को नया संसार बाकी है,।अभी प्रकृति ने जना कहां नया विश्व है ?अभी तो गढ़ने को नया इंसान बाकी है।।अभी तो विजय को सारा रण बाकी है,अभी तो करने.....

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सभी बढें हैं

सभी बड़े हैं ,सभी चले हैं गुरुवर तेरी राहों में।तरह तरह के फूल खिले हैं ,गुरुवर तेरी छांव ।।तपती हुई रेत थी नीचे, ऊपर जेठी घाम थीदुनिया में तो चहु ओर से मिली तपिश है आग की ,आकर मिली हिमालय.....

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स्वच्छता मनुष्यता का गौरव गन्दगी हटाने में उत्साह रहे.....